बाराबंकी। मानसून की पहली बारिश ने जहाँ प्रशासन के दावों की पोल खोल दिया वही तेज गर्मी से शहर से लेकर गांवों तक लोगों को राहत मिली। तापमान में अचानक गिरावट से मौसम सुहाना हो गया। शहर के बस स्टाप, नाके पर विशाल मेगामार्ट, सत्यप्रेमीनगर, दुर्गा पुरी, गाधी नगर वार्ड सहित तमाम शहरीय क्षेत्रों में नालियों का पानी सड़क पर आ गया जिससे राहगीरों को आने जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे अचानक मौसम ने करवट ली और जिले के कई क्षेत्रों में तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। जहां एक ओर यह बारिश धान की रोपाई में लगे किसानों के चेहरों पर मुस्कान ले आई, वहीं दूसरी ओर जर्जर सड़कों और लापरवाह तंत्र की पोल भी खोल गई।रामनगर तहसील क्षेत्र की सैकड़ों ग्राम पंचायतों में तेज हवाओं के साथ आई बारिश ने उमस भरी गर्मी से जूझ रहे लोगों को राहत दी। दलसराय, अशोकपुर, अमोली कला, गणेशपुर, रैली बाजार और मढ़ना सहित कई गांवों में धान की रोपाई में जुटे किसानों के चेहरों पर सुकून लौट आया। अब उन्हें सिंचाई के लिए पंपिंग सेट का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।हालांकि, बारिश शुरू होते ही बिजली आपूर्ति एहतियातन बंद कर दी गई, जिससे लोग घरों में अंधेरे में कैद होकर मौसम का आनंद लेने को मजबूर हो गए।बारिश ने रामनगर के रैली बाजार मार्ग की बदहाली को भी उजागर कर दिया। ग्राम पंचायत लोहटी जई के इस मार्ग की हालत इतनी खराब है कि बरसात में यह तालाब में तब्दील हो जाता है।
बाबूलाल, ऋषि कुमार, कल्लू और नन्हा जैसे ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से सड़क की मरम्मत नहीं हुई है। भारी जलभराव के कारण लोगों को नालियों के किनारे से होकर निकलना पड़ता है।एडीओ अभय कुमार शुक्ला ने जानकारी दी कि सड़क का चैड़ीकरण व इंटरलॉकिंग की कार्ययोजना तैयार है, जिसे बरसात के बाद तुरंत शुरू किया जाएगा। पर सवाल यह है कि हर साल की इस तकलीफ का अंत कब होगा?जबकि
सिरौली गौसपुर में तेज आंधी के दौरान बदोसरायदृटिकैतनगर मार्ग पर लगे दिशा संकेतक बोर्ड का अचानक टूटकर गिरना एक बड़े हादसे को न्योता दे गया।बोर्ड गिरकर एक स्कूटी को पूरी तरह चकनाचूर कर गया, लेकिन सौभाग्य से चालक उस वक्त स्कूटी पर नहीं था। यह दुर्घटना न केवल उसकी जान ले सकती थी, बल्कि आसपास मौजूद लोगों को भी चोट पहुंचा सकती थी।घटना से मार्ग पर भीषण जाम लग गया, जिसमें एक एंबुलेंस भी कुछ समय के लिए फंस गई।स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि सड़क किनारे लगे बोर्डों की नियमित जांच हो, जिससे ऐसी लापरवाहियों से जनहानि न हो।
बारिश किसानों के लिए खुशहाली की आहट बनकर आई है, लेकिन साथ ही तंत्र की उदासीनता और बुनियादी ढांचे की जर्जरता भी सामने लाई है।जहां एक ओर हरियाली की आस है, वहीं दूसरी ओर पानी से भरे गड्ढे, गिरते बोर्ड और बिजली गुल जैसी समस्याएं लोगों की दिनचर्या को बाधित कर रही हैं।यह बारिश हमें एक संदेश दे रही कि राहत के साथ-साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है।प्रशासन को चाहिए कि वह इन समस्याओं को प्राथमिकता दे, ताकि प्राकृतिक सौंदर्य और नागरिक सुविधा दोनों एक साथ चल सकें।