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शाहबाद: संचारी रोग नियंत्रण अभियान के संबंध में नोडल अध्यापकों को दिया गया प्रशिक्षण


शाहबाद। मंगलवार को ब्लाक सभागार शाहबाद में खंड शिक्षा अधिकारी पी एल निरंकारी की अध्यक्षता में नोडल अध्यापकों को 1 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक चलने वाले संचारी रोग नियंत्रण अभियान ब 11 जुलाई से 31 जुलाई तक घर घर दस्तक अभियान के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा सभी नोडल अध्यापकों को निर्देशित किया गया कि सभी नोडल अध्यापकों को अभियान से पहले ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति की बैठक करनी है जिसमें संचारी रोग नियंत्रण अभियान पर चर्चा करना व साफ सफाई के विषय में बताना सुनिश्चित करें।सभी विद्यालयों से संचारी रोग नियंत्रण अभियान के संबंध में दिनांक 1 जुलाई 2025 को रैली निकाली जाएगी। रैली में ग्राम प्रधान , राशन डीलर, ए एन एम, आशा कार्यकत्री, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, से सहयोग लेना सुनिश्चित करें ।बच्चों को प्रार्थना के समय संचारी रोगों दिमागी बुखार के विषय में ब साबुन से हाथ धोने के विषय में लगातार प्रेरित करते रहे।

चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर आर के चंदेल द्वारा बताया गया। संचारी रोगों से बचाव का सबसे सही तरीका मच्छरों से बचाव करना है। मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहने। यदि किसी व्यक्ति में संचारी रोगों के लक्षण दिखते हैं तो वह तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी जांच कराएं। संचारी रोग से बचाव हेतु नगरीय क्षेत्रों में वातावरणीय तथा व्यक्तिगत स्वछता के उपायों को अपनाना खुले में शौच न करें, शुद्ध पेयजल का प्रयोग करें, घर के आसपास उगी वनस्पतियों को नियमित रूप से साफ करे , कूड़े कचरे का गांव से बाहर निस्तारण करें। घर के आसपास पानी जमा ना होने दे यदि घर के आसपास कहीं पानी जमा है तो उस गड्ढे को मिट्टी से ढक दें या उसमे जला हुआ तेल डाल दे जिससे उस पानी में बैक्टीरिया ना पनपने पाए,डेंगू का मच्छर हमेशा दिन में ही काटते हैं,और साफ पानी में पनपते हैं।घर व घर के आसपास गमला नारियल का खोल, टायर या घर के किसी खाली बर्तन में पानी जमा न होने दे।

बी एम सी शादाब अली द्वारा बताया गया प्रदेश के सभी जनपदों में डायरिया रोको अभियान (स्टॉप डायरिया कैंपेन) दिनांक 16 जून 2025 से 31 जुलाई 2025 तक चलाया जाएगा। डायरिया विशेष रूप से कमजोर आबादी और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक चिंता बनी हुई है। डायरिया हमारे देश में बीमारी और मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से एक कारण बना हुआ है। कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों में डायरिया होने की संभावना अधिक हो सकती है। डायरिया से सुरक्षा के लिए स्वच्छता एवं हाथों को साबुन से साफ रखने से हम कई बीमारियों से सुरक्षित रह सकते हैं। डायरिया से बचाव हेतु दस्त के दौरान ओआरएस एवं जिंक के उपयोग के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना आवश्यक है। यदि किसी बच्चे में डायरिया के लक्षण दिखे तो अपनी एएनएम आशा कार्यकत्रियों से संपर्क कर जिंक ओआरएस प्राप्त कर उपचार शुरू कर सकते हैं। साथ ही बच्चों को समय से नियमित टीकाकरण कराकर भी डायरिया से हमारे बच्चे सुरक्षित रह सकते हैं।

बैठक में नोडल अध्यापक विवेक कुमार , कुलभूषण गौतम, यासीन खान, राहुल शर्मा, मोहम्मद खालिद खान, आबिद अली, आलोक पाल सिंह, आसिद अहमद, शिवदयाल, मोहम्मद नदीम आदि उपस्थित रहे।

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