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मेघालय और महाराष्ट्र पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन, बांग्लादेशी घुसपैठ रैकेट का किया भंडाफोड़


बांग्लादेश से मेघालय के रास्ते मुंबई में होने वाली बांग्लादेशी घुसपैठ के पीछे के एक बड़े रैकेट और चौकाने वाले मॉड्यूल का खुलासा मेघालय और महाराष्ट्र पुलिस ने संयुक्त ऑपेरशन के दौरान किया है. इस ऑपरेशन के दौरान मेघालय पुलिस ने पहले 25 बांग्लादेशी घुसपैठियों को नोंगपोह इलाके से गिरफ्तार किया. जांच के दौरान उसका कनेक्शन महाराष्ट्र के मुंबई और नवी मुंबई से जुड़े होने का पता चला.
इसके बाद मेघालय और महाराष्ट्र पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन में तीन दलालों को गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान शेख मोहम्मद मुजीब, नुसरत ए. काजी और जाबिर यूनुस शेख के रूप में हुई. जांच के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि बांग्लादेश से मेघालय के रास्ते में मुंबई में बांग्लादेशी नागरिकों को दाखिल कराने के लिए दलालों का रैकेट घुसपैठ के तीन मॉड्यूल का इस्तेमाल करता है.


पहले मॉड्यूल का नाम बांग्लादेश मॉड्यूल है, जिसमें शामिल दलाल उन लोगों की पहचान करते हैं, जिन्हें मेघालय के रास्ते घुसपैठ करके मुंबई में दाखिल होना होता है. इस मॉड्यूल के तहत दलाल ऐसे लोगों को इकठ्ठा करके मेघालय के रास्ते उन्हें भारत में दाखिल करवाते हैं. दूसरा मॉड्यूल है बॉर्डर मॉड्यूल, जिसके शामिल दलाल बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर मेघालय में एक सुनसान जगह पर पहुंचते हैं. तीसरा मॉड्यूल है रेल मॉड्यूल. इसके तहत दलाल रैकेट इन घुसपैठियों को लेकर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पहुंचता है और वहां से मुंबई के कुर्ला टर्मिनस आने वाली डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस में उन्हें बिठा दिया जाता है.

डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के जरिए ये घुसपैठिए मुंबई में दाखिल होते हैं और यहां पर आरोपी मुजीब फर्जी पते के प्रमाणों का उपयोग करके जाली दस्तावेजों की व्यवस्था करता है और सीमावर्ती शहरों से मुंबई, अहमदाबाद और उससे आगे के महानगरों में अवैध अप्रवासियों को ले जाने के लिए बिचौलियों को शामिल करता है.

पुलिस ने बताया कि तीनों मॉड्यूल में शामिल दलालों के यह रैकेट एक बांग्लादेशी घुसपैठिए को बांग्लादेश से मेघालय के रास्ते मुंबई में दाखिल करवाने के 25000 रुपये लेता है. असम से डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के जरिये ज्यादातर घुसपैठिए मुंबई में दाखिल होते हैं और फिर कुछ महीनों बाद उसी रास्ते से अवैध तरीके से अपने देश वापस लौटते हैं. महाराष्ट्र पुलिस की मदद से हमने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और कुछ अन्य की तलाश अभी भी जारी है.

मुंबई और नवी मुंबई से गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के कई और खुलासे सामने आये हैं. जांच में पता चला है कि नवी मुंबई से गिरफ्तार आरोपी नुसरत ए. काजी और जाबिर यूनुस शेख मुंबई आने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों के फर्जी पहचान पत्रों के जरिए बैंकों में खाते खोलते थे.

ये बैंक खाते घुसपैठियों के नाम पर खोले जाते थे लेकिन उसका इस्तेमाल दोनों आरोपी ऋण धोखाधड़ी और साइबर अपराधों के लिए इस्तेमाल करते थे, जिसमें वित्तीय घोटालों के लिए साइबर अपराधियों को बेचना भी शामिल था. जांच में पता चला है कि आरोपी जाबिर कोपरखैरने में कोटक महिंद्रा बैंक की ब्रांच में कॉन्ट्रैक्ट पर सर्वे करने का काम करता था और इसी का फायदा उठाकर उसने कोविडकाल के बाद 2022 से 2023 के बीच घुसपैठियों के नाम पर सैकड़ों फर्जी बैंक खाते खुलवाए और इन्हें साइबर ठगों को किराये पर देकर मोटा कमीशन कमाया है.

संयुक्त छापेमारी के दौरान पुलिस ने जाली दस्तावेज, आपत्तिजनक डिजिटल साक्ष्य और पहचान पत्र बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण भी आरोपियों के पास से जब्त किए गए हैं. पुलिस के मुताबिक, मुंबई और नवी मुंबई से गिरफ्तार तीनों आरोपी खुद के भारतीय होने का दावा कर रहे हैं लेकिन उसकी जांच जारी है

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