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मुसाफिरखाना: दीनबंधु भगवान् के हाथ मे जीवन दे के चलो-शैलजा जी


मुसाफिरखाना/अमेठी। जब ठाकुर जी से प्रेम हो जायेगा तो आप उनकी चिंता करेंगें और आपको उनकी परवाह हो जायेगी श्रीमद् भागवत कथा स्वयं नारायण के मुख से प्रारंभ हुई वहाँ से शिव जी को प्राप्त हुई। वहीं से नारद के पास आई।भगवान के तीन गुण है सत् चित और आनंद वे चराचर जगत में चैतन्य स्वरूप मे विद्यमान है। शरीर मे भगवत तत्व के निकल जाने से शरीर जड़ के समान हो जाता है।दुनिया मे जो भी दिख रहा है ऐसे पता नही कितने बृह्मांड प्रभू के रोम-रोम मे समाये है दीनबंधु के हाँथ मे अपना जीवन देकर चले बोझ रहित महसूस करेंगे उक्त विचार मुख्य यजमान रामेश्वर प्रसाद दूबे अढ़नपुर के यहाँ चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के षष्ठम् दिवस की कथा में कथा वाचिका ने बताई। आयोजित कथा में पंहुची कथा वाचिका शैलजा जी प्रयागराज ने व्यास पीठ से सांवरी सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया के स्वर छेड़ें तो माहौल मे भाव फैल गया और सैकड़ों की संख्या में श्रोता झूम उठे।यहाँ शैलजा जी ने बताया भगवान् दो तरीके से भक्त को रिझाते हैं पहला रूप से दूसरा अपने स्वभाव से अपना बनाते हैं। स्वर्णकादि ऋषियों को सूत जी बताई गयी महाभारत की कथा व राजा परीक्षित के जन्म की कथा का प्रसंग सुनाया।आगे शैलजा जी ने श्रोताओं को कंस वध,गोवर्धन की पूजा भगवान कृष्ण की रासलीला एवं भगवान कृष्ण और रूक्मिणी जी के विवाह की विस्तार से कथा सुनाई। कथा समापन के उपरांत मुख्य यजमान पंडित रामेश्वर प्रसाद दूबे सपत्नीक ने देर शाम व्यास पीठ की आरती उतारी। 

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