- निति और नियत की पोल खुली
भले ही सपा, बसपा, कांग्रेस, आरजेडी भाजपा सहित देशभर में राजनीतिक दल चलने वाले सभी नेता कितना भी ओबीसी एमबीसी दलित पिछड़ा करते रहें या महिलाओं से हमदर्दी दिखाने की नौटंकी करते रहें, लेकिन पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद राहुल गांधी सहित तमाम नेताओं द्वारा की गई प्रेस वार्ता में साफ हो गया है कि सर्वाधिक वोट रखने वाले ओबीसी के लिए उनके मन में जरा भी प्यार नहीं है सभी की नियत खराब है वरना जिस तरह से राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने प्रेस वार्ता करके चुनाव बाद बिहार की तर्ज पर इन राज्यों में जातिगत जनगणना कराने की घोषणा की है यह नेता तत्काल प्रभाव से यह भी घोषणा कर सकते थे कि जातिगत जनगणना जब होगी तब होगी हमारी पार्टी विधानसभा चुनाव में सभी जातियों की जातिगत जनगणना स्वयं या बिहार के जनसंख्या परिणाम को ध्यान में रख टिकट वितरण करेगी तथा सभी को विधानसभा में जाने और मंत्री बनने का मौका मिलेगा। लेकिन राहुल गांधी या सपा बसपा तो क्या भाजपा या नीतीश ने भी यह नहीं कहा कि हम विधानसभा चुनाव में अति पिछड़ी जातियों व पिछड़ी जातियों को सामाजिक न्याय समिति या रोहिणी आयोग की रिपोर्ट को ध्यान में रखकर टिकट वितरण करेंगे जो यह बताने को काफी है की सभी दलों के नेताओं द्वारा ओबीसी के प्रति प्रेम दिखाना केवल नाटक तक ही सीमित है या वोट हासिल करने का शिगूफा है।
और तो और लोकसभा में महिला आरक्षण बिल लाने वाली केंद्र सरकार तथा समर्थन करने वाले कई दर्जन दलों ने भी यह नहीं कहा कि हम अपने-अपने दलों से महिलाओं का 33ः आरक्षण ध्यान में रखकर महिलाओं को टिकट वितरण करेंगे लेकिन जनता जानती है कि सभी नेताओं के दांत खाने के अलग दिखाने के अलग हैं। मुझे तो ओबीसी प्रेम दिखाने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस सुनकर जोर का झटका धीरे से लगा कि राहुल गांधी कांग्रेस को सत्ता से बाहर ले जाने के कारण अंदर करने के लिए सभी को सम्मान देने की घोषणा करेंगे और कहेंगे कि चुनाव की घोषणा तो हो ही चुकी है सरकार बने या ना बने लेकिन हम पांचों राज्यों अथवा देश भर में न सिर्फ महिलाओं को बल्कि आरक्षित वर्ग के लोगों को रोहिणी आयोग की रिपोर्ट को ध्यान में रखकर सामाजिक न्याय करते हुए सभी जातियों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में टिकट वितरण करने का काम करेंगे ताकि वह लोग सदन में जाकर अपनी अपनी जातियों के हितों की रक्षा कर सकें। लेकिन राहुल गांधी ने तो साफ कर दिया कि चुनाव जीतने के बाद उनकी सरकार जातिगत जनगणना कराऐगी और जहां भाजपा की सरकार होगी वहां दबाव बनाकर जाति का जनगणना कराने का प्रयास करेगी।
मजेदार बात तो यह है कि अपने राज्य में जातिगत जनगणना करने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक ने यह नहीं कहा कि कांग्रेस को इन पांच राज्यों में टिकट वितरण करते समय सभी की हिस्सेदारी का ध्यान रखना चाहिए जिससे साफ हो गया कि यहां केवल प्रत्येक दल का नेता दिखावा करता है कुल मिलाकर में साफ शब्दों में कहना चाहता हूं कि यदि वाकई सभी दलों की आरक्षित वर्ग को लेकर हिस्सेदारी के बयान नौटंकी नहीं है तो वह अपनी-अपनी पार्टियों के प्रत्याशी चयन में बिहार राज्य या रोहिणी आयोग की जातिगत जनसंख्या का अनुपात ध्यान में रखकर टिकट वितरण करने की व्यवस्था करें ताकि जनता को दलों लोगों की नीति और नियत का पता चल सके। मुझे तो राहुल गांधी की बात सुन यह भी आश्चर्य हुआ कि उन्होंने खुद तो सभी की वाली घोषणा नहीं की देश के प्रधानमंत्री से भी पूछ डाला कि वह बताएं कि उन्होंने ओबीसी के लिए क्या किया। हालांकि मैं उनके द्वारा पूछने को गलत नहीं बताता लेकिन यह जरूर कहना चाहता हूं कि किसी भी व्यक्ति को चाहे वह नेता हो या अभिनेता अथवा राजनेता दूसरों में कमी निकालने से पहले अपने गिरेबान में झांक लेना चाहिए यदि वाकई भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने ओबीसी के लिए कुछ किया होता या एमबीसी को पर्याप्त संख्या में हिस्सेदारी दी होती तो यह लोग भाजपा का विरोध क्यों करते हैं।
विनेश ठाकुर ,सम्पादक
विधान केसरी ,लखनऊ
