धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने राम-कृष्ण पर अपने बयान के लिए माफी मांगते हुए कहा-हम थोड़े जोश में आकर कई बार ऐसा कर जाते हैं
November 03, 2026
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और भगवान राम को लेकर दिए गए अपने बयान पर सफाई देते हुए माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और ठाकुर जी के भक्त हैं और उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
धीरेंद्र शास्त्री ने साफ किया कि उनकी बातों का गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने कहा कि यह बात प्रेम और विनोद के भाव में कही थी। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उनके शब्दों से किसी के मन को आहत किया हो तो वे इसके लिए हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं।
बाबा बागेश्वर ने कहा, "हम भगवान राम और भगवान कृष्ण में भेद उत्पन्न नहीं करना चाह रहे थे उलाहना देकर, जैसे सखियां श्रीराम जी को गाली देकर उलाहना देती, जैसे गोपियां ठाकुर श्रीकृष्ण कन्हैया लाल जी को उलाहना देते, जैसे बिंदु जी महाराज श्री ठाकुरजी को उलाहना देते, जैसे बृज के संत श्री कोकिल साईं जी श्री रघुनाथ जी को उलाहना देते, वैसे ही हमने भाव में एक पद था किसी संत का, जो बहु प्रचलित पद है कि बंसी का बजाना तो खेल ही है, पर धनुष उठाना खेल नहीं, तो उसी भाव के कारण हमने कहा था, उसी की व्याख्या कर रहे थे, पर बहुत लोगों ने उसकी पूरी वीडियो ना देखकर आधी देख करके उसमें हमको कृष्ण विरोधी घोषित कर दिया, हम कृष्ण विरोधी नहीं हैं, हमारे ठाकुर जी हैं।"
बाबा बागेश्वर ने कहा, "हम खुद जन्मभूमि के लिए बार-बार आवाज उठाते रहे हैं, कृष्ण जन्मभूमि के लिए, हमारे नाम में भी तो उनका नाम लगा हुआ है, उनके कारण ही तो हमारा जीवन है, आप सब फिर भी किसी के मन में हमारी इस बात से, इस व्याख्या से, इस भाव से, किसी के मन में कोई बात आई, किसी को ठेस पहुंचा हम विनयी भाव से, बहुत क्षमा प्रार्थी हैं, बात का बतंगड़ और अर्थ का अनर्थ ना करके, समाज को हमने बांटने की कोशिश नहीं की, भगवान को बांटने की कोशिश नहीं की, भगवान को क्यों बांटेंगे, राम-कृष्ण दोनों एक हैं, अंतर नहीं निवेश, दोनों एक ही हैं, उनमें कहां अंतर है, हमने वो तो भावपूर्वक कहा था, फिर भी हम आप सबसे कहेंगे, हमारे भाव को समझा जाए।"
धीरेंद्र शास्त्री ने पहले वीडियो जारी करके अपने बयान के लिए माफी मांगी। उसके बाद जब वो कथा करने व्यास गद्दी पर बैठे तो एक बार फिर माफी मांगी। उन्होंने लाखों लोगों के सामने कहा कि उनकी प्रार्थना है कि अर्थ का अनर्थ ना निकाला करो, वो तो बस राष्ट्र प्रेम या राम प्रेम की बात करते हैं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, "भाव में कह तो दी ये भी नहीं कहना चाहिए था लेकिन क्या करें हम ना थोड़े जोश-जोश में आकर कई बार ऐसा कर जाते हैं। भाव-भाव में आकर कुछ भी कह जाते हैं। पर हमारा इंटेंशन ऐसा नहीं रहता कि किसी के विरोध में, अब हम खुद ठाकुर जी के भक्त हैं, अच्छा कुछ लोग, हमने इतना भर कह दिया कि ठाकुर जी टेढ़े हैं, रामजी सीधे हैं, इतने में ही लोग लिखने लगे कि बाबा कृष्ण विरोधी हैं। महापुरुषों ऐसा मत करो, ऐसा मत करो, हम समझ सकते हैं आपकी भावनाओं को, पर एक ही बात है। हम थोड़े ही ठाकुरजी के विरोधी हैं। हमने तो भाव में, इसको व्यास स्थिति कहते हैं, आपसे हमारी प्रार्थना है कि अर्थ का अनर्थ ना निकाला करो। राष्ट्र प्रेम या राम प्रेम की बात करते हैं तो हम आपसे ये नहीं कहते हैं कि हम आपको भारत का बनाना चाहते हैं, हम कहते हैं कि आप नैरोबी में ही रहो पर भारत के बनकर रहो।"
