लखनऊ। राजधानी स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। संस्थान में कथित तौर पर महिला डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के उत्पीड़न तथा धर्मान्तरण के सिंडिकेट से जुड़ी एसटीएफ की रिपोर्ट पर कड़ा एक्शन लेने के लिए केजीएमयू प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए 6 नवंबर को आपात कार्यपरिषद की एक अहम बैठक बुलाई गई है।
एसटीएफ की लंबी जांच रिपोर्ट में केजीएमयू के विभिन्न विभागों से जुड़े 12 लोगों (डॉक्टरों और कर्मचारियों) की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इनमें मुख्य आरोपियों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वाले लोग भी शामिल हैं। यह पूरा मामला पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, रेडियोलॉजी और गांधी वार्ड जैसे महत्वपूर्ण विभागों से जुड़ा हुआ है।
6 नवंबर को होने वाली आपात बैठक में एसटीएफ रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों, साक्ष्यों और लगाए गए गंभीर आरोपों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन आरोपों की गहराई से जांच के लिए एक आंतरिक उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने की तैयारी में है। रिपोर्ट में दोषी साबित होने वाले या गंभीर संलिप्तता मिलने वाले डॉक्टरों और कर्मियों की सेवाओं को समाप्त (बर्खास्त) करने तक की कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
एसटीएफ की इस रिपोर्ट और संभावित बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की खबर के बाद केजीएमयू के परिसरों और डॉक्टरों के बीच हड़कंप मच गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि शासन के निर्देशों के अनुसार पारदर्शी और सख्त कदम उठाए जाएंगे ताकि संस्था की गरिमा और कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
