ED के अनुसार, जांच वाटिका लिमिटेड के चार कमर्शियल प्रोजेक्ट से जुड़े कथित रियल एस्टेट फर्जीवाड़े की है. आरोप है कि निवेशकों को समय पर कब्जा देने, निश्चित रिटर्न और लीज रेंटल उपलब्ध कराने तथा सेल डीड(Sale Deed) जारी करने का भरोसा देकर निवेश कराया गया.
जांच एजेंसी के मुताबिक, इन चार परियोजनाओं में करीब 661 निवेशकों से 248.46 करोड़ रुपये एकत्र किए गए. हालांकि, अब तक निवेशकों को कथित तौर पर न तो परियोजनाओं का कब्जा दिया गया और न ही वादा किए गए सेल डीड जारी किए गए.
ED ने वित्तीय लेन-देन की जांच के दौरान निवेशकों से जुटाई गई रकम के कथित डायवर्जन का पता लगाने की कोशिश की है. एजेंसी के मुताबिक, घर खरीदारों/निवेशकों से जुटाई गई धनराशि को विभिन्न कंपनियों में ट्रांसफर किए जाने की आशंका है, जिनका संबंध गोपाल कांडा से बताया गया है.
ED की कार्रवाई का मुख्य फोकस कथित तौर पर निवेशकों की रकम के प्रवाह, उसे दूसरी कंपनियों में भेजे जाने और उससे जुड़े लाभार्थियों की पहचान पर है. तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
मामले में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका के आधार पर PMLA की धारा 17 के तहत तलाशी कार्रवाई की है. एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए वित्तीय ट्रेल के आधार पर कथित तौर पर डायवर्ट किए गए धन और उससे जुड़े लेन-देन की पड़ताल जारी है.
