दुर्गा पूजा के बाद बंगाल में बसों की सवारी होगी महंगी! बोले परिवहन मंत्री-प्राइवेट बसों के किराए में बढ़ोतरी के लिए सरकार दुर्गा पूजा के बाद विचार करेगी
September 15, 2026
पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने सोमवार को कहा कि राज्य में प्राइवेट बसों के किराए में बढ़ोतरी काफी समय से लंबित थी और सरकार दुर्गा पूजा के बाद इस पर विचार करेगी. प्राइवेट बस ऑपरेटरों के संगठनों के साथ बैठक के दौरान उन्होंने यात्रियों के लिए सुविधाओं में सुधार पर जोर दिया.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि बस किराए में बढ़ोतरी काफी समय से लंबित है. हम दुर्गा पूजा के बाद इस पर फैसला लेंगे. किराया बढ़ने के बाद ऑपरेटरों को यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देनी चाहिए." उन्होंने कहा कि हमें सड़कों पर बेहतर ढंग से संचालित बसों की जरूरत है, जिनमें AC बसें भी शामिल हों. मंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के मैदान टेंट में जॉइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट, सिटी सबअर्बन सर्विस और वेस्ट बंगाल बस एंड मिनीबस ओनर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की.
अर्जुन सिंह ने कहा कि भारी नुकसान उठा रहे राज्य परिवहन उपक्रमों को किराया पहले ही बढ़ा देना चाहिए था. वेस्ट बंगाल बस एंड मिनीबस ओनर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि पी.एन. बोस ने बताया कि मीटिंग में कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जैसे बसों पर जुर्माना लगाना और यहां तथा देश के दूसरे हिस्सों में रोड टोल के किराए में अंतर. उन्होंने कहा कि मंत्री ने इन सभी मुद्दों को हल करने का वादा किया है. बस ऑपरेटरों के लिए राहत पैकेज पर भी चर्चा हुई, लेकिन सरकार की ओर से कोई तुरंत आश्वासन नहीं मिला.
स्टेज 1 के लिए सरकार द्वारा तय किराया 7 रुपये है, जबकि प्राइवेट बस ऑपरेटर चुपके से 10 रुपये किराया लेते हैं. किराए में बदलाव की जरूरत है. किराये का जो ढांचा पिछले आठ साल से नहीं बदला है, वह अब आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रहा. उन्होंने कहा कि हम 2026 में 2018 के किराये पर काम नहीं चला सकते. बोस ने कहा कि अभी पहले चरण में हम ऑपरेशनल नुकसान की भरपाई के लिए 20 रुपये किराये की मांग कर रहे हैं. डीजल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर होने और मेंटेनेंस का खर्च लगातार बढ़ने के कारण प्राइवेट बस मालिकों का कहना है कि वे मौजूदा किराये के ढांचे के तहत अब बसें नहीं चला सकते.
बोस ने कहा कि सरकार को VAHAN से जुड़े बकाया जुर्माने पर एक बार की छूट देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कई प्राइवेट बस ऑपरेटर रूट को तर्कसंगत बनाने और अनौपचारिक रूप से किराया बदलने जैसे कदम उठा रहे हैं, क्योंकि यह इंडस्ट्री डीजल की ऊंची कीमतों और सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा के बाद यात्रियों की संख्या में कमी से जूझ रही है. उन्होंने ये भी बताया कि अभी कोलकाता की सड़कों पर लगभग 3,500 बसें चल रही हैं, जो कोविड से पहले की अवधि में चलने वाली करीब 6,000 स्टेज कैरिज बसों की तुलना में काफी कम हैं.
