मेडिकल कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं की जांच, भूमि विस्तार, अवैध कब्जे हटाने और आदिवासी काश्तकारों को खनन अधिकार देने की मांग।
लखनऊ/सोनभद्र। पूर्व सांसद नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जनपद सोनभद्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण और जनहित के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, सोनभद्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं, मेडिकल कॉलेज के विस्तार, अवैध कब्जों, अतिक्रमण तथा आदिवासी काश्तकारों के खनन अधिकारों से जुड़े विषयों पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
पूर्व सांसद ने मुख्यमंत्री को दिए गए पत्र में आरोप लगाया कि स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में शासन के पूर्व निर्देशों के बावजूद एक अधिकारी को महत्वपूर्ण वित्तीय एवं क्रय संबंधी प्रभार सौंपे गए हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में घटिया गुणवत्ता की सामग्री खरीदने, टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए खरीद को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित करने तथा पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
उन्होंने मेडिकल कॉलेज के भविष्यगत विकास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान परिसर में भूमि की कमी के कारण भविष्य में शैक्षणिक भवनों, छात्रावासों, शोध केंद्रों और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार में कठिनाइयां आ सकती हैं। साथ ही मेडिकल छात्रों के लिए खेल मैदान और संकाय सदस्यों के लिए मनोरंजन एवं हरित क्षेत्र विकसित करने हेतु अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता बताई।
पूर्व सांसद ने मेडिकल कॉलेज परिसर में बने सरकारी आवासों पर अनधिकृत कब्जों का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई ऐसे लोग अब भी आवासों में रह रहे हैं जिनका स्थानांतरण अन्य जनपदों में हो चुका है, जबकि वर्तमान में कार्यरत चिकित्सकों और कर्मचारियों को आवास उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने अवैध कब्जे हटाकर पात्र कर्मचारियों को आवास आवंटित करने की मांग की।
इसके अतिरिक्त मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में बढ़ते अतिक्रमण और अनधिकृत गतिविधियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। मुख्यमंत्री से अस्पताल परिसर को अतिक्रमण मुक्त कर सुरक्षित एवं क्लोज्ड कैंपस व्यवस्था लागू कराने का अनुरोध किया गया, जिससे मरीजों, छात्रों और कर्मचारियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध हो सके।
मुलाकात के दौरान पूर्व सांसद नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने आदिवासी एवं मूल काश्तकारों के खनन अधिकारों का मुद्दा भी मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि सोनभद्र के बिल्ली मारकुंडी, बरदिया, सिन्दूरिया, टापू, जुगैल सहित विभिन्न क्षेत्रों के आदिवासी भूमिधरों को वर्तमान खनन नीति का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मांग की कि निजी कास्त भूमि पर पत्थर, बालू एवं मोरम के खनन के लिए स्थानीय भूमिधरों को प्राथमिकता देते हुए 10 वर्षीय खनन पट्टा दिए जाने की व्यवस्था की जाए तथा संबंधित शासनादेश में आवश्यक संशोधन किया जाए।
पूर्व सांसद ने कहा कि इन मुद्दों का सीधा संबंध जनहित, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, शिक्षा व्यवस्था और आदिवासी समुदाय के अधिकारों से है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सभी प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने उनके द्वारा उठाए गए विषयों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक परीक्षण एवं कार्रवाई के लिए निर्देशित करने का आश्वासन दिया।
