बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त ने जिले में फैल रहे संक्रमण के पैटर्न पर चिंता जताते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित रक्त के अलावा अब सड़क किनारे और मेलों में बिना सुरक्षा मानकों के बनने वाले टैटू और नाक-कान छिदवाना संक्रमण का नया हॉटस्पॉट बनकर उभर रहा है। उप विकास आयुक्त आदित्य कुमार पीयूष ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि चंद रुपयों की बचत और थोड़ी सी लापरवाही युवाओं की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित ब्लड के अलावा टैटू बनवाना संक्रमण का नया एक कारण बन रहा है।
टैटू बनाने में इस्तेमाल होने वाली नई नीडल की कीमत 100 रुपये या उससे अधिक होती है। पैसों की बचत और जागरूकता की कमी के कारण टैटू कलाकार एक ही सुई का इस्तेमाल कई लोगों पर कर देते हैं। यदि सुई किसी एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के शरीर में चुभी है, तो वही सुई बिना स्टरलाइज़ किए दूसरे व्यक्ति में इस्तेमाल होते ही वायरस को सीधे खून में पहुंचा देती है। ग्रामीण इलाकों और बाजारों में बिना सुरक्षा मानकों के एक ही औजार से नाक और कान छिदवाने से भी संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ गया है। ऐसे में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है कि इस तरह से असुरक्षित तरीके से टैटू नहीं बनवाएं और ना ही असुरक्षित तरीके नीडल का प्रयोग करना या ब्लड वगैरह चढ़वाना चाहिए।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि एचआईवी/एड्स को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना बेहद जरूरी है। एड्स कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है जो साथ बैठने, छूने या खाना खाने से फैले। यह केवल असुरक्षित शारीरिक संबंध, संक्रमित सुई और दूषित ब्लड के संपर्क में आने से होता है। जिले में लगातार स्क्रीनिंग चल रही है और केस सामने आ रहे हैं। लोगों को घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है।
