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पहले जातिगत भेदभाव खत्म होना चाहिए-रामदास अठावले


केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जब तक समाज में जाति के आधार पर भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी.

रामदास अठावले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में भी देश में जाति के आधार पर भेदभाव की समस्या मौजूद है. उनके मुताबिक, आरक्षण किसी को दी गई खैरात नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार और समाज में उचित प्रतिनिधित्व का जरिया है.

अठावले ने कहा कि देश में कई जगहों पर आज भी जाति के आधार पर लोगों के साथ अलग व्यवहार किया जाता है. उन्होंने गांवों में अलग बस्तियों और शहरों में मकान या फ्लैट देने से कथित तौर पर मना किए जाने का जिक्र किया. उन्होंने यह भी कहा कि मंदिरों और सोशल मीडिया तक कई जगह जाति का असर दिखाई देता है. उनके अनुसार, कई बार व्यक्ति की योग्यता और उसके इंसान होने से ज्यादा उसकी जाति को महत्व दिया जाता है.

रामदास अठावले ने सोशल मीडिया पर मीम्स के जरिए भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के अपमान पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग के बच्चों के साथ होने वाला जातिगत भेदभाव किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि आरक्षण को लेकर स्वस्थ बातचीत और चर्चा हो सकती है, लेकिन जाति के आधार पर भेदभाव और डॉ. आंबेडकर के अपमान को सामान्य नहीं माना जा सकता.

अठावले ने कहा कि आरक्षण समाज के उन वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का माध्यम है, जिन्हें लंबे समय तक भेदभाव का सामना करना पड़ा है. उन्होंने इसे किसी तरह की आर्थिक मदद या खैरात मानने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति और वर्ग को अपनी मांग रखने का अधिकार है. उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS की आय सीमा बढ़ाने की मांग का समर्थन किए जाने का भी जिक्र किया.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब तक समाज में जातिगत भेदभाव मौजूद है, तब तक सरकारी क्षेत्र के साथ निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू होना चाहिए. उन्होंने आरक्षण खत्म करने की मांग करने वालों से कहा कि पहले वे देश के गांवों और शहरों में मौजूद जातिगत भेदभाव को खत्म करने की दिशा में काम करें. उनका कहना है कि जिस दिन जाति और उसके आधार पर होने वाला भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा, उस दिन आरक्षण की जरूरत भी खत्म हो सकती है.

रामदास अठावले का कहना है कि आरक्षण खत्म करने की चर्चा से पहले समाज में मौजूद जातिगत भेदभाव को खत्म करना जरूरी है. उन्होंने साफ कहा कि किसी एक वर्ग को मिल रहे अधिकार को छीनने की सोच सही नहीं है.

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