लखनऊ। राजधानी के कुर्सी रोड स्थित सेंट मैरी पॉलीक्लिनिक से जुड़ा यह मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है। अस्पताल प्रबंधन और बिचैलियों के गठजोड़ से नवजात शिशुओं की अवैध खरीद-फरोख्त और फर्जी दस्तावेजों के जरिए बच्चों को सौंपने के इस रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है।
कुर्सी रोड बहादुरपुर स्थित सेंट मैरी पॉलीक्लिनिक में 30 जुलाई को आरती नाम की महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया। आरती के पहले से तीन बच्चे थे। अस्पताल के संचालक डॉ. विनोद और उनकी पत्नी डॉ. शालू पर आरोप है कि उन्होंने जाली मेडिकल और जन्म रिकॉर्ड तैयार किए। दस्तावेजों में जैविक मां (आरती) का नाम हटाकर निसंतान महिला (रेनू शर्मा) का नाम दर्ज कर दिया गया।
चाइल्ड लाइन, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पुलिस ने बच्चे को सकुशल बरामद कर हजरतगंज के बाल शिशु गृह भेज दिया है। आरोपी डॉक्टर दंपत्ति, आरती और रेनू शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और गुडंबा पुलिस की संयुक्त टीमें जांच में जुट गई हैं। एडीसीपी क्राइम किरन यादव के अनुसार, बच्चे के वास्तविक जैविक मातृत्व की पुष्टि के लिए नवजात शिशु, उसकी असली मां (आरती) और कथित मां (रेनू शर्मा) का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। अस्पताल के मूल डिस्चार्ज रिकॉर्ड, रजिस्टर, डिजिटल डेटा और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की जा रही है। पुलिस ने अस्पताल से बीते दो सालों में हुए सभी प्रसवों का डेटा मांगा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या पहले भी इस तरह के फर्जीवाड़े किए गए हैं।
जांच अधिकारी इस पहलू पर भी काम कर रहे हैं कि यह मामला केवल दो-तीन लोगों तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित मानवध्अंग तस्करी नेटवर्क काम कर रहा है। छोटे नर्सिंग होम और अस्पतालों की भूमिका की विशेष रूप से निगरानी की जा रही है।
एडीसीपी किरन यादव और बाल कल्याण अधिकारियों ने आमजन से अपील की है कि किसी भी स्थिति में अस्पताल, बिचैलियों या निजी समझौतों के माध्यम से बच्चा गोद न लें। भारत में दत्तक ग्रहण केवल केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत ही कानूनी रूप से मान्य है। उन्होंने कहा कि किसी अस्पताल या व्यक्ति को पैसे देकर या फर्जी कागज बनवाकर बच्चा लेना गैर-कानूनी है और इसमें शामिल सभी पक्षों को जेल हो सकती है।यदि आपको किसी अस्पताल, नर्सिंग होम या बिचैलिए द्वारा नवजात शिशुओं की अवैध खरीद-फरोख्त या तस्करी की जानकारी मिले, तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइनरू 1098,एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (।भ्ज्न्)रू 7839861034 एवं स्थानीय पुलिसरू 112 या नजदीकी थाना को सूचित करें।
