प्रतापगढ़। जिले में धान की रोपाई लगभग पूर्ण होने के बाद खेतों में विभिन्न प्रकार के कीट एवं रोगों का प्रकोप देखने को मिल रहा है। इसे देखते हुए जिला कृषि रक्षा अधिकारी अनिल प्रसाद मिश्र ने किसानों के लिए फसल सुरक्षा संबंधी विस्तृत एडवाइजरी जारी करते हुए समय रहते उचित प्रबंधन एवं उपचार अपनाने की सलाह दी है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि धान की फसल में खैरा रोग, दीमक, पत्ती लपेटक कीट तथा तना बेधक का प्रकोप बढ़ने की संभावना है। खैरा रोग जिंक की कमी से होता है, जिससे पत्तियां कत्थई रंग की हो जाती हैं और पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट एवं 2.5 किलोग्राम बुझा चूना 800 लीटर पानी में घोलकर फ्लैट फैन नोजल से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
दीमक के प्रकोप से पौधों की जड़ एवं तना क्षतिग्रस्त होकर सूखने लगते हैं। इसके नियंत्रण के लिए सिंचाई के पानी के साथ क्लोरोपाइरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी का 3 से 4 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करने की सलाह दी गई है। पत्ती लपेटक कीट पत्तियों के किनारों को जोड़कर उनके भीतर की हरी सतह को खुरच देता है, जिससे पत्तियों पर सफेद पारदर्शी धारियां दिखाई देने लगती हैं। इसके नियंत्रण के लिए संतुलित उर्वरकों का प्रयोग, खेत में उपस्थित मकड़ियों को संरक्षित रखना चाहिये तथा दो ताजी पत्तियों पर नालीनुमा संरचना दिखाई देने पर क्यूनालफास 25 प्रतिशत ईसी का 1.25 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
तना बेधक कीट तने में छेद कर पौधों के पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है। इसके नियंत्रण के लिए अंडों के झुण्ड अथवा सुंडी दिखाई देने पर फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एससी का 1 लीटर प्रति हेक्टेयर अथवा नीम ऑयल का 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को यह भी अवगत कराया कि कृषि रक्षा रसायनों पर मिलने वाला अनुदान डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा जाता है। अधिक जानकारी के लिए किसान जिला कृषि रक्षा अधिकारी के मोबाइल नंबर 7839882338 पर संपर्क कर सकते हैं।
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