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वंदे मातरम! राहुल गांधी तुष्टिकरण को बढ़ा रहे-अमित शाह


वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के फैसले को लेकर बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश विरोधी फैसला लिया है. कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है. देश की जनता इसके खिलाफ एकजुट हो.

अमित शाह ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए बयान में कहा, ''1937 में कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम के दो टुकड़े करके देश के विभाजन की नींव डाली और पाकिस्तान का जन्म हुआ. कांग्रेस ने लाखों शहीदों का भी अपमान किया, जिन्होंने वंदे मातरम का नारा लगाते लगाते फांसी पर चढ़ गए. कांग्रेस पार्टी 1937 का अपनी पार्टी का रेज्यूलेशन मान रही है और संसद के एक्ट को नकार रही है.''

उन्होंने कहा, ''राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी फिर एक बार तुष्टिकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रही है. जनता से अपील है कि...देश ने गलती की थी और गंभीर परिणाम हमने भुगते. अब इसके खिलाफ एकजुट हों, कांग्रेस के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद करें. हम आजाद देश हैं. नरेंद्र मोदी ने गलती को सुधारा है.''

कांग्रेस ने वंदे मातरम पर जारी विवाद के बीच बुधवार को बड़ा फैसला लिया. कांग्रेस ने कहा कि वह ‘वंदे मातरम’ को लेकर 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और उस समय के अन्य प्रमुख नेताओं की तरफ से लिए किए गए फैसले का पूरी तरह पालन करेगी. यानि पार्टी वंदे मातरम का सभी 6 छंद नहीं बल्कि पहले की तरह ही दो ही छंद गाएगी.

वंदे मातरम से जुड़े बिल को मानसून सत्र में सरकार लाई थी. इसके तहत वंदे मातरम के 6 छंद गाना अनिवार्य किया गया. वहीं, कांग्रेस का तर्क है कि आजादी के पहले देश के महापुरुषों ने 2 छंद गाना स्वीकार किया था.

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा, कांग्रेस ने अब अपने अपमान को एक प्रस्ताव की शक्ल दे दी है. उसकी कार्यसमिति ने तय किया है कि कांग्रेस के मंचों पर ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे. जब कुछ दिन पूर्व यही अपमान एक व्यक्ति के आचरण में उजागर हुआ था, तब कांग्रेस ने उसे संयोग बताकर टाल दिया था. आज वही अपमान कांग्रेस की नीति बन चुका है. ‘भारत माता’ की इस पावन वंदना का अपमान उन हजारों बलिदानियों का तिरस्कार है, जिन्होंने इसी गीत को अपनी चेतना में रखकर राष्ट्र के लिए बलिदान दिया था. यह केवल एक राजनीतिक बचाव नहीं, बल्कि उस वोट बैंक की भूख का प्रमाण है, जिसके आगे कांग्रेस ने हर बार राष्ट्र के स्वाभिमान को गिरवी रखा है. कांग्रेस आज की नई मुस्लिम लीग बन गई है.

कांग्रेस के फैसले पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि वंदे मातरम् भारत का गौरव है. इसका पूरा संस्करण न गाना न सिर्फ गीत का अपमान है. बल्कि भारत माता का अपमान है. कांग्रेस पार्टी की लीग जैसी मानसिकता बदली नहीं है. 1937 में मुस्लिम लीग के प्रेशर में कांग्रेस ने पूरा वंदे मातरम् न गाने का फैसला किया था. आज भी कांग्रेस भारत की संस्कृति, मूल्यों, परंपराओं और जड़ों से कटी हुई है. और सस्ती वोट बैंक की राजनीति में लगी हुई है.

इस पूरे विवाद पर एबीपी न्यूज से बातचीत में गिरिराज सिंह ने कहा कि खरगे मुस्लिम लीग को लीड कर रहे हैं. भेड़िया जो छिपा हुआ था वो बाहर आ गया. 15 अगस्त को इसको छिपाने की कोशिश की थी. वंदे मातरम का अपमान भारत का अपमान है. देश संविधान से चलेगा. सोनिया गांधी ने शादी के 15 साल बाद तक नागरिकता नहीं ली, उनको देश से क्या प्रेम होगा.

पूरे मसले पर विश्व हिंदू परिषद की तरफ से भी बयान सामने आया है. वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा है कि जानते हैं! स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यालय में पूरा बजाने के बाद भी कांग्रेस ने वंदे मातरम् के सिर्फ दो ही छंद गाने का निर्णय फिर से क्यों लिया और वहां तीनों ने उसका घोर अपमान क्यों किया? क्योंकि शेष भाग में धर्म, मर्म, शक्ति, भक्ति, मंदिर, वाणी, विद्या और दुर्गा जैसे विशिष्ट शब्दों का प्रयोग होता है, जो भारतीय संस्कार, संस्कृति, पुरातन परंपराओं, आस्था, विश्वास तथा राष्ट्रीय जीवन मूल्यों से सघन रूप से जुड़े हुए हैं. ऐसे शब्दों को भला विदेशी मानसिकता से प्रेरणा लेने वाली कांग्रेस कैसे अपना सकती थी! वैसे भी जिस फड़फड़ाती पतंग की डोर एक विदेशी मूल के व्यक्ति के हाथों में हो और जिहादी तुष्टिकरण के बिना पार्टी का गुजारा ना हो तो, वह मरती, क्या न करती.

इस पूरे विवाद पर कांग्रेस के सांसद पवन खेड़ा ने भी बयान दिया है. उन्होंने बीजेपी और आरएसएस को लेकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के समय आप (RSS) कहाँ थे? अब आप हमें 'वंदे मातरम' के बारे में बता रहे हैं. ऐसा कहकर वे रबींद्रनाथ टैगोर, सी. राजगोपालाचारी, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और पंडित नेहरू के विचारों के खिलाफ जा रहे हैं. हमें हैरानी नहीं है क्योंकि उस समय भी RSS इन महान लोगों का विरोध करता था. गोडसे और सावरकर के परिवार वालों ने आज माना है कि गोडसे RSS का हिस्सा थे. यही वजह है कि वे (BJP) आज 'वंदे मातरम' और गांधी जी के खिलाफ बोल रहे हैं. क्या ये देशद्रोही अब हमें 'वंदे मातरम' के बारे में सिखाएंगे?

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