सुप्रीम कोर्ट से झटका! तरुण तेजपाल को जेल जाना ही होगा
August 25, 2026
रेप मामले में दोषी ठहराए गए तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने उन्हें 2 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने और सरेंडर सर्टिफिकेट जमा करने का निर्देश दिया है. इसके बाद उनकी अपील पर 22 सितंबर को सुनवाई होगी.
4 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट ने तरुण तेजपाल को अपने ऑफिस की जूनियर सहयोगी से रेप के लिए 10 साल की सजा सुनाई थी. हाई कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया था. तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट से सरेंडर से छूट की मांग की थी. उन्होंने अपनी अपील लंबित होने का हवाला दिया था.
तरुण तेजपाल के लिए पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह घटना 2013 की है और तेजपाल करीब 6 महीने को छोड़कर पूरे समय जमानत पर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने सजा सुनाने के साथ ही सजा पर अंतरिम रोक भी लगाई थी. उन्होंने यह भी कहा कि तेजपाल अब वरिष्ठ नागरिक हैं, उनका परिवार और दो बेटियां हैं. जमानत के दौरान उनके किसी तरह के दुर्व्यवहार की कोई शिकायत या रिपोर्ट नहीं है.
सिब्बल का कहना था कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं. इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने सजा पर रोक लगाई थी. इसलिए अब सुप्रीम कोर्ट से अलग से सरेंडर से छूट मांगने की जरूरत नहीं होनी चाहिए और उनकी मुख्य अपील पर सीधे सुनवाई होनी चाहिए. सिब्बल ने यह भी कहा कि इस स्तर पर मामले के गुण-दोष पर बहस नहीं होनी चाहिए, बल्कि सिर्फ इस सवाल पर सुनवाई होनी चाहिए कि तेजपाल को सरेंडर करने से छूट दी जा सकती है या नहीं.
गोवा पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने सजा पर रोक इसलिए लगाई थी ताकि तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट जाने और वहां सरेंडर से छूट मांगने का मौका मिल सके. इसका यह मतलब नहीं है कि वे बिना छूट लिए सीधे अपनी अपील पर सुनवाई की मांग कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि 1970 के जिस कानून का सिब्बल ने हवाला दिया है, वह एक अस्थायी व्यवस्था थी. अब आपराधिक मामलों में अपील की पूरी प्रक्रिया उपलब्ध है. अगर सरेंडर से छूट चाहिए थी तो उसके लिए अलग से आवेदन करना जरूरी था. सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि तेजपाल को करीब 10 साल की सजा मिली है और अपराध गंभीर है. इसलिए उन्हें जेल जाने से छूट नहीं दी जानी चाहिए.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस आलोक अराधे ने कहा कि उन्होंने हाई कोर्ट के फैसले में दर्ज सभी बातों को देखा है. इस मामले में अपराध की प्रकृति और सजा की अवधि काफी महत्वपूर्ण हैं. जस्टिस अराधे ने सरेंडर से छूट की मांग खारिज करते हुए तेजपाल को 2 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया.
