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बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया! सिवान में पुलिस ने छात्रों पर क्यों चलाई थी AK-47?


बिहार सरकार ने भी छात्र प्रदर्शन मामले पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है. बिहार सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है.

सिवान में एक कांस्टेबल भीड़ में फंस गया था, इसलिए उसने AK-47 से हवा में 4 गोलियां चलाईं. इससे किसी को नुकसान नहीं पहुंचा. हाथी चौक के पास एक ASI ने भीड़ हटाने के लिए 9mm पिस्टल से दो गोलियां चलाईं, जिससे 3 प्रदर्शनकारियों को मामूली चोट आई. जिन 3 लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है, वह AK-47 की गोली से घायल नहीं हुए थे. AK-47 चलाने वाले कांस्टेबल को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

प्रदर्शन के दौरान कई जगह हिंसा, पत्थरबाजी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया. पूरे राज्य में 157 पुलिसकर्मी और सात सरकारी कर्मचारी घायल हुए. छपरा में दो BDO समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए. 22 से 25 जुलाई के बीच 69 FIR दर्ज हुईं और 500 लोग गिरफ्तार हुए.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले 222 छात्रों को जमानत पर छोड़ा गया, जबकि 75 नाबालिगों को रिहा किया गया. छात्रों और प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं.

राज्य सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश अतिरिक्त डीजीपी को दिए गए हैं. प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है. सरकार का कहना है कि छात्रों समेत प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है. देशभर में छात्रों के प्रदर्शन में हुई पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है.

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