वेतन, भत्तों और रिक्त पदों को लेकर वर्षों से लंबित मांगों पर संगठन ने शासन व राजस्व परिषद से मांगा शीघ्र निर्णय
शाहबाद। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ, जनपद रामपुर ने प्रदेश स्तर की लंबित मांगों के साथ-साथ जनपद की स्थानीय समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि शासन एवं राजस्व परिषद द्वारा शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
जिलाध्यक्ष अमरीश कुमार और जिला मंत्री सुमित कुमार सक्सेना ने संयुक्त रूप से बताया कि प्रदेश स्तर पर संघ द्वारा वर्ष 2025-26 की लंबित पदोन्नति सूची तत्काल जारी करने, वर्ष 2024 बैच के विभागीय परीक्षा परिणाम व प्रशिक्षण प्रमाणपत्र शीघ्र घोषित करने तथा अंतर्जनपदीय स्थानांतरण पोर्टल पुनः खोलने की मांग उठाई गई है। इसके अलावा लेखपालों के मोटरसाइकिलध्वाहन भत्ते को बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह, वर्दी भत्ता 1000 रुपये प्रतिवर्ष तथा स्टेशनरी भत्ता 500 रुपये प्रतिमाह किए जाने, लेखपालों को मूल कार्यों तक सीमित रखते हुए अन्य विभागों के अनावश्यक कार्यों से मुक्त करने तथा ग्राम सचिवालयों में बैठने की व्यवस्था, फर्नीचर, कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली, पेयजल व सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
पदाधिकारियों ने बताया कि जनपद रामपुर में भी कई गंभीर समस्याएं वर्षों से लंबित हैं। आय, जाति एवं निवास प्रमाण-पत्रों में प्रयुक्त प्रिंटिंग सामग्री का मानदेय लगभग तीन वर्षों से भुगतान नहीं हुआ है, जबकि वर्ष 2021 की कृषि गणना (क्रॉप कटिंग) का भुगतान भी अब तक लंबित है। जनपद के 35 लेखपालों के नवीन पेंशन प्रणाली (एनपीएस) खाते अब तक नहीं खोले गए हैं, जिससे प्रत्येक कर्मचारी को प्रतिवर्ष लगभग एक लाख रुपये तक की संभावित आर्थिक हानि हो रही है।
संघ ने यह भी बताया कि जनपद में स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल 215 लेखपाल कार्यरत हैं, जबकि लगभग 120 लेखपाल पिछले दस वर्षों से दो या दो से अधिक हलकों का कार्यभार संभाल रहे हैं। रिक्त पदों के कारण शासन को अनुमानित 72 करोड़ रुपये की वेतन बचत हुई है, लेकिन इसका सीधा दुष्प्रभाव जनसेवा, राजस्व कार्यों की गुणवत्ता तथा लेखपालों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। वर्तमान में मात्र 800 रुपये प्रतिमाह मकान किराया भत्ता (एचआरए) एवं 300 रुपये प्रतिमाह यात्रा भत्ता दिया जा रहा है, जिसे संघ ने मौजूदा महंगाई की तुलना में अत्यंत अपर्याप्त बताया।
जिला मंत्री सुमित कुमार सक्सेना ने कहा कि लेखपाल राजस्व प्रशासन की आधारशिला हैं और किसानों, आमजन तथा शासन की अधिकांश जनकल्याणकारी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन लेखपालों के माध्यम से ही होता है, बावजूद इसके वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान न होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
संघ ने चेतावनी दी है कि प्रदेश स्तर पर 5 अगस्त से लेखपाल अतिरिक्त जिम्मों को छोड़कर केवल मूल कार्यों पर ही काम करेंगे, जबकि 10 अगस्त से सभी ऑनलाइन कार्य भी बंद कर दिए जाएंगे। संघ ने स्पष्ट किया कि यदि समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीकों से आंदोलन की आगामी रणनीति घोषित करने के लिए बाध्य होगा।
