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लखनऊ: प्रशासन की आपराधिक खामोशी का नतीजारू सावन मेले में टूटा झूला, 3 भाई-बहनों समेत कई मासूम गंभीर, नगर निगम की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल


लखनऊ। राजधानी में नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की बेपरवाही व आपराधिक लापरवाही आखिरकार मासूम बच्चों पर भारी पड़ गई। इंदिरानगर (गाजीपुर थाना क्षेत्र) में आयोजित सावन महोत्सव मेले में मंगलवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया, जहाँ अचानक झूला टूटने से कई लोग उसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हैरान करने वाली बात यह है कि इस मेले में सुरक्षा इंतजामों को लेकर 3 दिन पहले ही खबर प्रकाशित कर आगाह किया गया था, लेकिन नगर निगम, स्थानीय पुलिस और प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोता रहा।

मंगलवार शाम करीब 7रू30 बजे नया गांव विजयीपुर (विभूतिखंड) निवासी 14 वर्षीय अंकिता सिंह अपने भाई सूर्या सिंह, बहन इशिका, नैंसी, अनामिका और दोस्त आयुष शर्मा के साथ मेले में पहुँची थी। झूला झूलते समय अचानक झूले की एक ट्रॉलीध्बकेट टूटकर नीचे आ गिरी, जो सीधे अंकिता के चेहरे पर लगी।

मौके पर मौजूद परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने रोते-बिलखते हुए झूला रोकने की गुहार लगाई, लेकिन आरोप है कि दबंग संचालक ने झूला तुरंत नहीं रोका। इसी बीच झूले का दूसरा हिस्सा एक अन्य लड़की (विमालनगर निवासी 16 वर्षीय निशा कुमारी) पर जा गिरा। भारी हंगामे और शोर-शराबे के बाद ही झूले को रोका जा सका।

हादसे के तुरंत बाद घायलों को पास के सुषमा अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक अंकिता सिंह के चेहरे और शरीर पर गंभीर चोटें, मल्टीपल फ्रैक्चर की पुष्टि।नैंसी और निशा कुमारी  गंभीर रूप से घायल, इलाज जारी। हादसे में कई अन्य बच्चों को भी मामूली व गंभीर चोटें आई है।

यह हादसा महज एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि नगर निगम की खुली शह पर हुआ प्रशासनिक अपराध है। क्या नगर निगम के अधिकारियों ने मेले में लगे झूलों की एनओसी  और टेक्निकल फिटनेस की जाँच की थी? जब 3 दिन पहले ही इस खतरे को लेकर मीडिया द्वारा आगाह कर दिया गया था, तो नगर निगम और गाजीपुर थाना पुलिस ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?  आरोप लग रहे हैं कि नगर निगम के मातहत अधिकारी कमर्शियल परमिशन और फीस के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी करते हैं और जनता की जान से खिलवाड़ करने की खुली छूट दे देते हैं।

यदि नगर निगम और स्थानीय पुलिस ने समय रहते संज्ञान लिया होता, तो आज ये मासूम अस्पताल के बिस्तरों पर दर्द से न तड़प रहे होते। जनता अब दोषी झूला संचालक के साथ-साथ आंखें मूंदकर बैठे नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही है।

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