लखनऊ। नगर निगम जोन-3 में ष्अंधेर नगरी चैपट राजाष् वाली कहावत पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। जोन कार्यालय में लिपिक से लेकर कर अधीक्षक की देखरेख में राजस्व में बड़ी हेराफेरी और घपलेबाजी का मामला सामने आया है। स्थानीय दुकानदारों और आम जनता का आरोप है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर अवैध वसूली का काला खेल लंबे समय से धड़ल्ले से चलाया जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी चूना लग रहा है।
ताजा मामला जोन-3 के वार्ड 296 का है, जहाँ अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों की शह पर दुकानदारों से मनमाने तरीके से वसूली की गई। वसूले गए पैसों का न तो किसी सरकारी रजिस्टर में कोई अंकन किया गया और न ही करदाताओं को कोई वैध रसीद दी गई।
अजीब बात यह है कि पूरे मामले पर कर अधीक्षक आँखें मूँदे बैठे हैं, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि ऊपरी स्तर की शह और मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल होना संभव नहीं है।
इस घपलेबाजी की पोल तब खुली जब पीड़ित दुकानदार मोहम्मद शफी ने जोनल अधिकारी (नगर निगम जोन-3, लखनऊ) को लिखित शिकायती पत्र सौंपा।
अलीगंज, बनारसी टोला, जनपद रोड पर सिलाई की दुकान चलाने वाले मो. शफी ने बताया कि नगर निगम के कर्मचारियों ने उनसे ₹7,200 (सात हजार दो सौ रुपये) की रकम वसूल की थी। कर्मचारियों ने दावा किया था कि एक-दो दिनों में वेंडिंग जोन की रसीद दे दी जाएगी, लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी उन्हें रसीद प्राप्त नहीं हुई है। पीड़ित द्वारा 13 अगस्त 2026 को दी गई इस लिखित शिकायत पर 18 अगस्त 2026 को टीएस के मार्कध्हस्ताक्षर भी दर्ज हैं।
लिखित शिकायत मिलने के बाद भी दोषी लिपिक पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। न तो संबंधित लिपिक से चार्ज वापस लिया गया है और न ही अवैध रूप से वसूली गई रकम की भरपाई की गई है। नगर निगम प्रशासन की इस सुस्ती से साफ है कि विभाग भ्रष्ट कर्मचारियों को संरक्षण देने में जुटा है।
जोन-3 कार्यालय अपनी कारगुजारियों के कारण लगातार विवादों में घिरा हुआ है। हाल ही में जोन कार्यालय से गन्ने की एक मशीन भी रहस्यमय तरीके से गायब हो गई थी। मीडिया में खबर छपने के बाद जोनल अधिकारी ने सभी कर्मचारियों को बुलाकर सिर्फ इसलिए श्पेच टाइटश् किए थे ताकि जोन के अंदर की खबरें बाहर मीडिया तक न पहुँचें, बजाय इसके कि भ्रष्टाचार और चोरी रोकने के कड़े कदम उठाए जाते।
नगर निगम के इस रवैये से जनता में भारी आक्रोश है और उच्चाधिकारियों से इस पूरे गिरोह तथा राजस्व घोटाले की निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की जा रही है।
