लखनऊ। राजधानी के पारा क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित डेयरियों, प्रदूषण और गंदगी के खिलाफ लखनऊ नगर निगम द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के बाद बड़ा सियासी और प्रशासनिक घमासान छिड़ गया है। नगर निगम की टीम ने पारा इलाके में छापेमारी कर सैकड़ों पशुओं को जब्त किया था, जिन्हें ऐशबाग, ठाकुरगंज, आलमबाग, पीजीआई कांजीहाउस और कान्हा व राधा उपवन गोशालाओं में रखा गया था।
सोमवार को नगर निगम मुख्यालय स्थित त्रिलोकनाथ सभागार में आयोजित खुली बोली प्रक्रिया में 41 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। नीलामी कमेटी (अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त, डॉ. अरविंद कुमार राव, पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा आदि) की निगरानी में 243 भैंसों की नीलामी की गई, जिससे नगर निगम को कुल ₹58.89 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ। नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शहर को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए अवैध डेयरियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
नीलामी की इस कार्रवाई के खिलाफ डेयरी कारोबारी, पशुपालक और विपक्षी दल सड़क पर उतर आए। नगर निगम मुख्यालय के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन हुआ, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाकर कई लोगों को हिरासत में लिया और इको गार्डन भेज दिया। डेयरी कारोबारियों की मांग है कि नगर निगम को कार्रवाई से पहले प्रभावित लोगों का पक्ष भी सुनना चाहिए। लखनऊ पश्चिम से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अरमान खान ने निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं आजाद समाज पार्टी और सपा कार्यकर्ताओं ने पूरी कार्रवाई में रिश्वतखोरी के आरोप लगाते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।
इस पूरी कार्रवाई ने लखनऊ में नगर निगम की व्यवस्था, पशुपालकों के रोजगार और स्थानीय राजनीति को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।
