होर्मुज पर 100% कंट्रोल का ट्रंप ने किया दावा, भड़के ईरान का पलटवार
August 11, 2026
यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि यूएस नेवी ने होर्मुज से बारूदी माइंस को पूरी तरह हटा दिया है. ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज पर 100 फीसदी कंट्रोल अमेरिकी सेना ने कर लिया है. उन्होंने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसेना का पूरा कंट्रोल बताते हुए तेहरान के मुआवजे की मांग को खारिज कर दिया. उधर, ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि इस जलमार्ग से सुरक्षित नौवहन के लिए अमेरिकी घेराबंदी और नौसैनिक नाकाबंदी का खत्म होना जरूरी है.
राष्ट्रपति ने कहा कि जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की परमिशन दी जा रही है, लेकिन उन्हें ईरान जाने की इजाजत नहीं है. ट्रंप ने कहा कि ईरान समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाकर जहाजों की आवाजाही को बाधित कर सकता है. उनके मुताबिक, अमेरिकी फोर्स ने इस इलाके में सुरंगों की तलाश और सफाई का काम किया है. ट्रंप ने कहा कि हमने पूरे होर्मुज स्ट्रेट को बारूदी सुरंगों से फ्री कर दिया है. हम होर्मुज स्ट्रेट पर 100 प्रतिशत कंट्रोल रखते हैं.
ईरान की ओर से यूएस से नुकसान के मुआवजे की मांग के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि बीते 50 वर्षों में ईरान की कार्रवाइयों से प्रभावित लोगों को मुआवजा मिलना चाहिए. हम भी पिछले 50 वर्षों में उनके द्वारा किए गए नुकसान के लिए पैसे मांगेंगे. ट्रंप ने उन लोगों का जिक्र किया, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे ईरान की वजह से मारे गए या घायल हुए. उन्होंने उन प्रदर्शनकारियों के परिवारों का भी उल्लेख किया, जो उनके अनुसार देश में अशांति के दौरान मारे गए थे.
उधर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने क्षेत्रीय हालात और होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल से फोन पर बातचीत की.
उन्होंने होर्मुज को लेकर साफ किया है कि इस जलमार्ग में पैदा हुई असुरक्षा की स्थिति के लिए पूरी तरह से इजरायल और अमेरिका की ओर से तेहरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई का नतीजा है. न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, अराघची ने यह भी कहा कि होर्मुज में सुरक्षा दोबारा बहाल करने के लिए यूएस की आक्रमक कार्रवाई और गैरकानूनी दखलंदाजी को खत्म करना जरूरी है.
अराघची पहले ही ये साफ कर चुके हैं कि इस समय ईरान की अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है. हालांकि, कुछ मध्यस्थ अब भी बातचीत दोबारा शुरू कराने के रास्ते तलाशने की कोशिश कर रहे हैं. हमारे नजरिए से तब तक वार्ता फिर से शुरू नहीं हो सकती, जब तक अमेरिका समझौते का उल्लंघन बंद नहीं करता और पहले किए गए उल्लंघनों की भरपाई नहीं करता.
