Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

Sonebhadra: पंचशील मल्टी स्पेशियल्टी हॉस्पिटल जारी किया प्रेस विज्ञप्ति कहा कि हॉस्पिटल को कुछ लोग बदनाम करने की कर रहे है साजिश।

हॉस्पिटल प्रबंधक ने यह भी कहा कि जिस दिन हमारे हॉस्पिटल पर भारी सख्या में भीड़ इकट्ठा हुई उस दिन धारा 144 लागू था ।


सोनभद्र। हॉस्पिटल प्रबंधक ने कहा कि उपरोक्त प्रकरण के संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया माध्यमों द्वारा भ्रामक एवं तथ्यहीन समाचार प्रकाशित एवं प्रसारित न कि जाय ।मरीज को पेट में गंभीर दर्द एवं सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के कारण हमारे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आवश्यक चिकित्सीय जांच के उपरांत यह निदान हुआ कि उनकी किडनी ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर रही थी तथा फेफड़ों में पानी भरा हुआ था। समस्त जांच पूर्ण होने के बाद मरीज को उच्च स्तरीय उपचार हेतु रेफर कर दिया गया था। हालांकि, मरीज के परिजनों ने तत्काल रेफरल सेंटर पर ले जाने में असमर्थता व्यक्त करते हुए अगले दिन ले जाने की बात कही। अगले दिन परिजनों द्वारा मरीज को दोपहर में ले जाने की सूचना दी गई तथा अपराह्न 03:30 बजे अस्पताल से डिस्चार्ज करा लिया गया। इसके बाद मरीज के परिजन अपने द्वारा बुलाए गए एम्बुलेंस से अपने परिचित व्यक्ति के साथ अपनी इच्छा से वाराणसी के किसी निजी अस्पताल लेकर गए। हमारे अस्पताल से जाने के पश्चात उसी दिन रात्रि लगभग 10:30 बजे मरीज को मृत अवस्था में पुनः हमारे अस्पताल लाया गया। इसके उपरांत हमारे वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ एवं अस्पताल निदेशक के विरुद्ध एक निराधार प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई। कुछ व्यक्तियों द्वारा व्यक्तिगत स्वार्थवश हमारे अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों एवं निदेशक को झूठे मामले में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में संबंधित व्यक्तियों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के समक्ष याचिका प्रस्तुत की गई थी। उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन के उपरांत उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है तथा राज्य के अधिकारियों से प्रतिवाद (काउंटर एफिडेविट) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही निजी प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी किया गया है।
वर्तमान में यह मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। अतः प्रकरण से संबंधित किसी भी प्रकार की अपुष्ट, भ्रामक अथवा तथ्यहीन खबरों का प्रकाशन, प्रसारण अथवा सोशल मीडिया पर प्रसारित करना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जा सकता है। संबंधित पक्षों से अपेक्षा की जाती है कि वे न्यायालय में विचाराधीन मामले के संबंध में केवल सत्यापित तथ्यों का ही प्रकाशन एवं प्रसारण करें।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |