कुंडा/प्रतापगढ़। कुंडा तहसील के चर्चित एवं विवादों से घिरे लेखपाल विष्णु प्रसाद पर आखिरकार प्रशासनिक कार्रवाई की गाज गिर गई। विभागीय कार्यों में लापरवाही, जनता की शिकायतों के प्रति उदासीनता और कथित रूप से रूखे व्यवहार के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम कुंडा वाचस्पति सिंह ने उन्हें निलंबित कर दिया। निलंबन की खबर सामने आते ही कई गांवों में खुशी की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रसन्नता जाहिर की।
ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल विष्णु प्रसाद की कार्यशैली लंबे समय से विवादों के घेरे में थी। ऐमापुर बिंधन, रायगढ़, झींगुर, महेवामलकिया और चेतरा गांव के लोगों ने सोशल मीडिया पर खुलकर प्रतिक्रिया देते हुए कार्रवाई का स्वागत किया। कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना ष्सुविधा शुल्कष् लिए उनके द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाता था, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
मामले को और गंभीर बनाते हुए एक दिवंगत पूर्व लेखपाल के पुत्र ने भी विष्णु प्रसाद पर वरासत के नाम पर धन उगाही का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि गंगा एक्सप्रेसवे से प्रभावित भूमि के मुआवजे के अनुपात में वरासत दर्ज करने के लिए मोटी रकम की मांग की गई थी। बाद में तत्कालीन तहसीलदार के हस्तक्षेप के बाद ही वरासत की प्रक्रिया पूरी हो सकी थी।
गौरतलब है कि निलंबित लेखपाल विष्णु प्रसाद वर्तमान में महेवामलकिया और झींगुर ग्राम सभा में तैनात थे। इससे पहले वह रायगढ़ और ऐमापुर बिंधन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके निलंबन को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। इस संबंध में एसडीएम कुंडा वाचस्पति सिंह का कहना है कि लेखपाल विष्णु प्रसाद को निलंबित करके उसके खिलाफ जांच कराई जा रही है।
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