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भारतीयों के खिलाफ चीन की चाल को सिंगापुर ने दी मात, दिया नफरती कंटेंट को ब्लॉक करने का आदेश


सिंगापुर सरकार ने भारतीय समुदाय के खिलाफ भड़काऊ और विभाजनकारी सामग्री फैलाने वालों पर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट तक लोगों की पहुंच रोकने का आदेश दिया है, जो भारतीय समुदाय को निशाना बनाता है और देश की बहुसांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। सिंगापुर का मानना है कि इस तरह के कंटेंट की शुरुआत बहुत हद तक चीन से जुड़े ऑनलाइन सूचना तंत्र के माध्यम से हुई।

भारत में सिंगापुर के उच्चायोग ने शनिवार को इस संबंध में जानकारी दी। सिंगापुर के गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक, ऑनलाइन क्रिमिनल हार्म्स एक्ट 2023 के तहत सिंगापुर पुलिस बल ने यूट्यूब, फेसबुक और एक्स पर प्रसारित हो रही कुछ पोस्टों के खिलाफ 'डिसेबलिंग डायरेक्शन' जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सिंगापुर के यूजर्स इन पोस्टों तक पहुंच न बना सकें। सरकार का कहना है कि ये पोस्ट भारतीय समुदाय के खिलाफ नफरत और गलत धारणाएं फैलाने का प्रयास कर रही थीं।

गृह मंत्रालय के मुताबिक, पिछले महीने चीनी ऑनलाइन सूचना क्षेत्र में कुछ ऐसे नैरेटिव फैलने शुरू हुए, जिनमें दावा किया गया कि सिंगापुर अपनी सांस्कृतिक पहचान और जातीय राजनीति को लेकर चिंतित है। इसके कुछ ही समय बाद इंटरनेट पर ऐसी सामग्री सामने आने लगी, जिसमें सिंगापुर की सांस्कृतिक विविधता पर सवाल उठाए गए और यह दिखाने की कोशिश की गई कि देश भारतीयों से 'भरता' जा रहा है। सरकार ने कहा कि इन पोस्टों में कई भ्रामक और भड़काऊ दावे किए गए।

चीन की तरफ से आए इन कंटेंट्स में कहा गया कि सिंगापुर की बहु-नस्ली या मल्टीरेशियल नीति केवल पश्चिमी देशों को प्रभावित करने के लिए बनाई गई एक दिखावटी व्यवस्था है। कुछ पोस्टों में यह भी दावा किया गया कि देश की स्थिरता का कारण उसकी बहु-नस्ली नीति नहीं, बल्कि चीनी मूल की बहुसंख्यक आबादी है। इसके अलावा, कुछ सामग्री में यह आरोप लगाया गया कि सिंगापुर में भारतीय मूल के राजनेताओं की संख्या बढ़ रही है और वे भारतीय प्रवासियों के पक्ष में काम करेंगे।

वहीं कुछ पोस्टों में यह भी कहा गया कि सिंगापुर की संस्कृति मूल रूप से चीनी संस्कृति है और यदि सरकार चीन से दूरी बनाते हुए भारतीय समुदाय के बढ़ते प्रभाव को नजरअंदाज करती रही तो इसके नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। सिंगापुर सरकार ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि देश न तो जातीय श्रेष्ठता की सोच को स्वीकार करता है और न ही विदेशियों के प्रति नफरत को। सरकार ने स्पष्ट कहा कि किसी भी समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश को सख्ती से रोका जाएगा।

बयान में कहा गया कि जब ऐसे हमले किसी विदेशी स्रोत से किए जाएं तो वे और भी गंभीर हो जाते हैं। सरकार सामाजिक एकता, नस्ली सद्भाव और राष्ट्रीय एकजुटता को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी और ऐसे मामलों में दृढ़ता से कार्रवाई करेगी। सिंगापुर सरकार ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाली जानकारी को बिना जांचे-परखे साझा न करें। लोगों से कहा गया है कि वे अफवाहों और भड़काऊ सामग्री से सावधान रहें तथा समाज को बांटने की किसी भी कोशिश को मिलकर असफल बनाएं।

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