मीडिया के कुछ हिस्सों में उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया-चीफ जस्टिस
May 17, 2026
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और बढ़ गया है. दरअसल, एक सुनवाई के दौरान CJI ने कुछ लोगों की तुलना कॉकरोच से की थी. यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. इसके बाद कई लोगों ने इसे देश के युवाओं पर की गई टिप्पणी मान लिया और आलोचना शुरू हो गई. अब इस मामले में खुद चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सफाई दी है.
CJI की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मीडिया के कुछ हिस्सों में उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया. उन्होंने साफ कहा कि उनका इशारा देश के युवाओं की तरफ नहीं था. उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी उन्होंने एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान की थी, जिसे उन्होंने निरर्थक मामला बताया.
चीफ जस्टिस ने कहा कि उनकी नाराजगी उन लोगों को लेकर थी जो फर्जी डिग्री के जरिए वकालत जैसे सम्मानित पेशे में घुस आते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोग सिर्फ न्याय व्यवस्था ही नहीं बल्कि मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे प्रतिष्ठित क्षेत्रों में भी पहुंच जाते हैं. उनके मुताबिक, ऐसे लोग समाज के लिए परजीवी की तरह हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि उन्होंने देश के युवाओं का अपमान किया. CJI ने स्पष्ट किया कि उनका बयान केवल फर्जी डिग्री और धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ था.
इस बीच इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चीफ जस्टिस के बयान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री का मुद्दा उठा दिया. पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब पारदर्शिता इतनी जरूरी है, तो प्रधानमंत्री की डिग्री भी सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध कराई जानी चाहिए. TMC ने सवाल उठाया कि आखिर न्यायपालिका ने जनता को प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री और शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज देखने से क्यों रोका. पार्टी ने यह भी कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट फर्जी लॉ डिग्री की जांच के लिए CBI जांच का आदेश देने की बात कर रहा है, तो पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी और गुजरात यूनिवर्सिटी को प्रधानमंत्री की डिग्री सार्वजनिक करने का निर्देश देना चाहिए.

