प्रतापगढ़/बाबागंज। कुंडा तहसील का राजस्व विभाग अपने ही न्यायालय के आदेशों का पालन कराने में असफल नजर आ रहा है। महेशगंज थाना क्षेत्र के परियावा गांव में सरकारी बंजर भूमि पर हुए अवैध कब्जे को हटाने के लिए तहसीलदार न्यायालय द्वारा दो बार बेदखली का आदेश दिए जाने के बावजूद आज तक कब्जा नहीं हटाया जा सका। मामला समाधान दिवस तक पहुंचने के बाद अब राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
परियावा गांव निवासी देवराज पुत्र रामटहल पर आरोप है कि उसने गांव स्थित गाटा संख्या 376 की बंजर भूमि, रकबा 0.013 हेक्टेयर पर पक्का मकान बनाकर अवैध कब्जा कर लिया। मामले में लेखपाल द्वारा 09 अप्रैल 2003 को तहसीलदार न्यायालय में बेदखली का मुकदमा दायर किया गया था। सुनवाई के बाद तहसीलदार न्यायालय ने 03 सितंबर 2003 को ही बेदखली का आदेश पारित कर दिया था। हालांकि, अपने खिलाफ हुए आदेश के विरुद्ध देवराज ने न्यायालय में बाजदायरा प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
इसके बाद पुनः सुनवाई करते हुए तहसीलदार न्यायालय ने 30 मई 2022 को फिर से बेदखली एवं क्षतिपूर्ति का आदेश जारी किया। आदेश के अनुपालन के लिए तत्कालीन तहसीलदार धर्मेंद्र सिंह ने 27 अप्रैल 2024 को नोटिस जारी कर कब्जाधारक को स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन न तो अवैध कब्जा हटाया गया और न ही प्रशासन द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई की गई।
आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद करीब चार वर्षों से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बरकरार है। इससे नाराज गांव निवासी पवन यादव ने समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कर राजस्व विभाग से न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराने और सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग की है।
मामले में तहसीलदार कुंडा अलख शुक्ला ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। यदि न्यायालय का आदेश पारित है तो अवैध कब्जा हटवाने के साथ ही क्षतिपूर्ति की वसूली भी कराई।

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