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सिंहपुर: जनगणना ड्यूटी में बड़ा खेल?! शिकायत करने वाले शिक्षक पर कार्रवाई से उठे गंभीर सवाल


सिंहपुर/अमेठी।
सिंहपुर ब्लॉक के चिलौली क्षेत्र में जनगणना 2027 ड्यूटी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ड्यूटी लगाने और बदलने में कथित लेनदेन के आरोपों के बीच शिकायत करने वाले शिक्षक के निलंबन ने पूरे मामले को और गर्मा दिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर शिकायत की जांच करने के बजाय शिकायतकर्ता शिक्षक पर ही कार्रवाई क्यों की गई?। जानकारी के अनुसार प्राथमिक विद्यालय चिलौली द्वितीय के प्रधानाध्यापक धर्मेंद्र कुमार रावत ने लगातार बदली जा रही जनगणना ड्यूटी को लेकर तहसीलदार तिलोई को लिखित शिकायत दी थी। आरोप है कि शिकायत के बाद न तो कोई निष्पक्ष जांच कराई न ही शिकायतकर्ता को कोई नोटिस दिया गया। इसके कुछ समय बाद ही शिक्षक को निलंबित कर दिया गया, जिससे शिक्षा विभाग और तहसील प्रशासन दोनों सवालों के घेरे में आ गए हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि कई कर्मचारियों की ड्यूटी बार-बार अलग-अलग क्षेत्रों में बदली गई। किसी की ड्यूटी पाकरगांव तिलोई से रस्तामऊ, फिर टेढ़ई और बाद में खानापुर चपरा तक बदल दी गई, जबकि कुछ कर्मचारियों की ड्यूटी चिलौली से शेखनगांव और फिर पूरे मिश्रन क्षेत्र में स्थानांतरित की गई। लगातार हो रहे इन बदलावों ने कर्मचारियों के बीच असंतोष पैदा कर दिया। सूत्रों के मुताबिक कई शिक्षकों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर आरोप लगाया कि जनगणना ड्यूटी लगाने और बदलने की प्रक्रिया में लेनदेन का खेल चल रहा था। उनका कहना है कि कुछ कर्मचारियों को बार-बार राहत दी जा रही थी जबकि अन्य कर्मचारियों को दूर-दराज क्षेत्रों में भेजा जा रहा था। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में चर्चाएं लगातार तेज हैं। इस पूरे मामले पर तहसीलदार अभिषेक यादव ने कहा कि ड्यूटी तहसील स्तर से बदली जाती है और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मिलने के आधार पर बदलाव किए जाते हैं। उनके अनुसार बीमारी, दुर्घटना या महिला कर्मचारियों की विशेष परिस्थितियों में ड्यूटी बदलना सामान्य प्रक्रिया है। वहीं सिंहपुर के खंड शिक्षा अधिकारी हरिओम तिवारी का कहना है कि जनगणना ड्यूटी तहसील स्तर से लगाई जाती है और विभाग केवल कर्मचारियों की सूची उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय तहसील प्रशासन का होता है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने कहा कि मामले की जानकारी एसडीएम कार्यालय और तहसीलदार स्तर से ली जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि एसडीएम कार्यालय से रिपोर्ट मिलने के बाद विभागीय कार्रवाई की गई है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि सब कुछ नियमों के तहत हुआ, तो शिकायत की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई गई? शिकायत करने वाले शिक्षक को ही निलंबित करने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? अगर ड्यूटी बदलाव सामान्य प्रक्रिया थी, तो बार-बार बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? और यदि लेनदेन के आरोप लग रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच क्यों नहीं हो रही?। स्थानीय लोगों और शिक्षकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, ड्यूटी बदलाव की प्रक्रिया सार्वजनिक करने और शिकायतकर्ता शिक्षक के साथ न्याय करने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।

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