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मजदूर दिवस! बिहार का नाम बदल कर 'श्रमिक प्रदेश' कर देना चाहिए-तेजस्वी यादव


1 मई की तारीख को दुनियाभर में मजदूर दिवस या श्रमिक दिवस के तौर पर मनाया जाता है। बता दें कि इस दिवस को मनाने की शुरुआत साल 1886 में की गई थी। भारत में भी कई प्रमुख हस्तियों ने श्रमिक दिवस के मौके पर बधाई संदेश दिया है और विकास में योगदान देने वाले श्रमिकों के योगदान की सराहना की है। बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी शुक्रवार को लोगों को श्रमिक दिवस की शुभकामनाएं दीं। हालांकि, तेजस्वी ने इसके साथ ही एक ऐसा बयान दे दिया जो कि अब वायरल हो रहा है। तेजस्वी ने कहा है कि बिहार राज्य का नाम बदलकर श्रमिक प्रदेश कर दिया जाना चाहिए। आइए जानते हैं कि तेजस्वी यादव ने ऐसा क्यों कहा।

दरअसल, तेजस्वी यादव ने कहा है कि श्रमिकों के उत्थान और बेहतरी पर सकारात्मक चर्चा का अभाव देखने को मिलता है जो कि काफी दुखद है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों, उनके परिजन, गांव और प्रदेश की प्रगति बिना विकसित भारत की बात करना बेईमानी है। तेजस्वी ने इस दौरान बिहार की एनडीए सरकार पर निशाना साधा। तेजस्वी ने कहा कि बीते 21 साल से एनडीए सरकार की पॉलिसी के कारण बिहार के करीब 4 करोड़ लोग काम की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़ा भयावह है।

तेजस्वी यादव ने कहा- "दूसरे राज्यों में ‘बिहारी’ को कभी गोली तो कभी गाली दी जाती है।‘बिहारियों’ को मिल रही इस पीड़ा का जिम्मेदार 21 वर्षों की NDA सरकार है। चाहे नोटबंदी हो, लॉकडाउन हो या LPG की कमी! बिहार के प्रवासी मजदूर हर बार प्रभावित हुए हैं। मजबूरी में मजदूर बिहार वापस भी आए लेकिन किस तरह से, ये पूरी दुनिया ने देखा है। आज जब समूचे देश में गैस सिलेंडर का संकट है, जिससे प्रभावित होकर बड़ी संख्या में मजदूर व कामगार बिहार लौट रहे हैं। लेकिन उन लाखों मजदूरों के रोजगार, रोजी-रोटी का राज्य सरकार कोई प्रबंध नहीं कर रही है। बिहार के मजदूर, मजबूर होकर परदेस न गए तो फिर गुजरात-महाराष्ट्र और अन्य विकसित राज्यों की फैक्ट्री कैसे चलेगी?"

तेजस्वी यादव ने कहा- "नाम बदलने के विशेषज्ञ भाजपाइयों खासकर बिहार के मनोनीत नए-नवेले बड़बोले मुख्यमंत्री को ‘श्रमिक दिवस’ का नाम बदल कर 'बिहार समर्पित दिवस' अथवा बिहार का नाम बदल कर 'श्रमिक प्रदेश' कर दिया जाना चाहिए। बिहार विगत 21 सालों में औद्योगिक उत्पादन में नगण्य परंतु श्रमिकों की सप्लाई में अव्वल है। NDA सरकार पलायन रोकने की दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं कर रही है भले ही बिहार के मजदूर, मजबूर रहें- घर से दूर रहें।"

दरअसल, दुनियाभर में मजदूर दिवस मनाने का रिवाज 139 साल पुराना है। साल 1877 में मजदूरों ने काम के घंटे तय करने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। ये आंदोलन कुछ ही साल में पूरी दुनिया में फैलने लगा। 1 मई 1886 को तो अमेरिका में लाखों मजदूरों ने एक साथ हड़ताल शुरू कर दी। अमेरिका के 11,000 फैक्ट्रियों के करीब तीन लाख अस्सी हजार मजदूरों ने इस आंदोलन में भाग लिया। इसी के साथ 1 मई को 'मजदूर दिवस' मनाने की शुरूआत हुई।

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