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सिख धार्मिक संपत्तियों पर नियंत्रण के मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार


सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (20 मई, 2026) को देशभर में सिख धार्मिक और विरासत संपत्तियों की सुरक्षा, ऑडिट और विनियमन के लिए कई निर्देश जारी करने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया.

देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने यह याचिका लगी. बेंच ने याचिकाकर्ता चरणजीत सिंह से कहा कि वह अपनी शिकायतें संसद की याचिका समिति के सामने उठाएं. दिल्ली के एक सिख संगठन से जुड़े चरणजीत सिंह खुद सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए और अपना पक्ष रखा. उन्होंने बेंच के सामने झुककर भी नोटिस जारी करने की अपील की.

चरणजीत सिंह ने कहा, 'मैं आपके सामने नतमस्तक हूं. कृपया मेरी याचिका पर नोटिस जारी करें.' इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट के दरवाजे हमेशा खुले हैं, लेकिन मांगी गई राहत विधायी क्षेत्र के अंतर्गत आती है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'अदालत आपके लिए है, आप जब चाहें आ सकते हैं, लेकिन इन मुद्दों के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता है, जिसके लिए आपको संसद जाना होगा. आपको संसद की याचिका समिति से संपर्क करना चाहिए.'

उन्होंने कहा, 'अगर हम इसमें हस्तक्षेप करते हैं, तो ऐसा प्रतीत हो सकता है कि धार्मिक मामलों में दखल दिया जा रहा है.' हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि अगर वह संसद से मिलने वाले जवाब से संतुष्ट नहीं हों, तो दोबारा सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं. इस जनहित याचिका में देशभर में सिख धार्मिक और विरासत संपत्तियों के प्रबंधन की व्यवस्था में व्यापक बदलाव का अनुरोध किया गया था.

याचिका में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को उन मामलों की जांच का निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया है, जिनमें सिख विरासत संपत्तियों के बड़े पैमाने पर अवैध हस्तांतरण, कम मूल्यांकन, गबन या उससे प्राप्त धन के शोधन के आरोप हों.

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