आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में ‘गुजरात स्थापना दिवस’ के अवसर पर सेवा, संस्कृति और शिक्षा से जुड़े विविध कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना रहा। कार्यक्रमों का सफल संचालन नोडल अधिकारी प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद खंदारी परिसर स्थित आरोग्य केंद्र में ‘सेवा भाव’ के तहत 50 टीबी रोगियों को पोषण पोटली वितरण से हुई। राज्यपाल सचिवालय, उत्तर प्रदेश के निर्देशानुसार आयोजित इस पहल में जरूरतमंद मरीजों को पौष्टिक सामग्री प्रदान की गई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं विश्वविद्यालय टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह पहल ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ को सशक्त बनाने की दिशा में सराहनीय कदम मानी गई।
इसके बाद इतिहास विभाग के 32 छात्र-छात्राओं ने प्रो. बी.डी. शुक्ला के नेतृत्व में सिकंदरा स्थित अकबर के मकबरे का शैक्षिक भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने स्मारक, आर्ट गैलरी एवं संग्रहालय का अवलोकन कर ऐतिहासिक धरोहरों की गहन जानकारी प्राप्त की।
गृह विज्ञान संस्थान में “गुजरात व्यंजन प्रदर्शनीरू स्वाद, संस्कृति और स्वास्थ्य” विषय पर आकर्षक प्रदर्शनी आयोजित की गई। इसमें छात्राओं ने ढोकला, खांडवी, थेपला, फाफड़ा, श्रीखंड, गुजराती कढ़ी सहित 20 से अधिक पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया और उनकी पोषणीय विशेषताओं की जानकारी दी। साथ ही मल्टीग्रेन प्रीमिक्स के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश भी दिया गया।
इसी क्रम में ‘बापू बाजार’ का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे। इस पहल से छात्राओं को उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का व्यावहारिक अनुभव मिला।
सामाजिक सरोकार के तहत ग्राम नगला तल्फी में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। छात्रों ने श्रमदान कर ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया और स्वच्छ समाज का संदेश दिया।
दिन का समापन महिला छात्रावास में पारंपरिक गुजराती गरबा नृत्य के साथ हुआ, जिसमें छात्राओं और महिला शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कुलसचिव अजय मिश्रा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में सामाजिक संवेदनशीलता, सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करते हैं। विश्वविद्यालय का यह प्रयास समग्र विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
