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ट्विशा शर्मा मौत मामला : सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच से स्थिति साफ होने की उम्मीद जताई


सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल के ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में सभी पक्षों को अनावश्यक बयानबाजी न करने को कहा है. कोर्ट ने मीडिया से भी अनुरोध किया है कि वह पीड़ित या आरोपी पक्ष के बयानों के आधार पर मामले को सनसनीखेज तरीके से पेश करने से बचे. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि सीबीआई मामले की निष्पक्ष जांच करेगी और उसे सही निष्कर्ष तक पहुंचाएगी.

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेकर यह सुनवाई की. 3 सदस्यीय बेंच में जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली भी शामिल थे. चीफ जस्टिस ने कहा, 'हमें इस बात से थोड़ा दुख हुआ कि कुछ लोग यह छवि बना रहे हैं कि न्यायपालिका जांच को प्रभावित कर रही है. हमने इसलिए यह सुनवाई शुरू की.'

33 साल की ट्विशा की 12 मई को मौत हुई थी. शुरुआती जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसे फांसी लगाने से हुई मौत बताया गया लेकिन ट्विशा के परिवार ने इस पर असंतोष जताते हुए दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की. उन्होंने कहा कि ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह रिटायर्ड जिला जज हैं और पति समर्थ वकील. वह जांच को अपने पक्ष में प्रभावित कर रहे हैं.

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश कर दी. वहीं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ट्विशा के दोबारा पोस्टमार्टम का आदेश दिया. हाई कोर्ट के आदेश पर एम्स, दिल्ली के डॉक्टरों ने भोपाल जाकर पोस्टमार्टम किया. इसके बाद रविवार, 24 मई को ट्विशा का दाह संस्कार कर दिया गया.

सोमवार, 25 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही मध्य प्रदेश सरकार के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले के अब तक के घटनाक्रम की जानकारी दी. जजों ने मध्य प्रदेश सरकार की इस बात के लिए सराहना की कि उसने जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की. कोर्ट ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस को इससे हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़ित परिवार की मांग के मुताबिक हाई कोर्ट ने पार्थिव शरीर का दोबारा पोस्टमार्टम करवाया है. अब देश की एक बड़ी एजेंसी मामले की जांच को अपने हाथों में लेने जा रही है. ऐसे में हम पीड़ित परिवार और आरोपी पक्ष से कहना चाहते हैं कि वह सार्वजनिक बयान न दें. अपनी बात जांच एजेंसी के सामने रखें ताकि जांच पर गलत असर न पड़े.

मीडिया के अति उत्साह से मामले के प्रभावित होने की कोर्ट की टिप्पणी पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मीडिया का बचाव किया. उन्होंने कहा कि इस केस में मीडिया के चलते ही कई बातें सामने आई हैं. कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए कहा, 'अब हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि मामले के संभावित गवाहों और आरोपियों के गैरजरूरी बयान न ले. यह जांच के नतीजों को प्रभावित कर सकता है.'

पीड़ित परिवार के लिए पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और आरोपी परिवार के लिए पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह केस के तथ्यों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता है. सभी पक्ष जांच में सहयोग करें. जजों ने यह भी कहा कि जांच के दौरान सभी पक्ष अपने पास उपलब्ध कानूनी विकल्पों के इस्तेमाल के लिए स्वतंत्र हैं.

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