अमेठी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने की एक सशक्त पहल है। माननीय मुख्यमंत्री जी उत्तर प्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ जी की मंशा है कि प्रदेश की प्रत्येक महिला आत्मनिर्भर बने, अपने पैरों पर खडी हो और परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ करे। इसी उद्देश्य को धरातल पर उतारने के लिए जनपद अमेठी में जिलाधिकारी श्री संजय चैहान के निर्देशन एवं मार्गदर्शन तथा डीसी एनआरएलएम प्रवीणा शुक्ला के प्रभावी क्रियान्वयन से अनेक महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही हैं। इन्हीं में से एक प्रेरणादायी उदाहरण है विकास खंड बहादुरपुर के ग्राम पंचायत सरवन की निवासी उमा साहू की सफलता की कहानी।
परिचय
उमा साहू एक साधारण ग्रामीण परिवार से संबंध रखती हैं। उनके परिवार में पति और दो बच्चे हैं। पहले उनका जीवन आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच संघर्षपूर्ण था। परिवार की आय का मुख्य स्रोत केवल खेती था, जिससे मासिक लगभग 6000 रुपये की आय होती थी। इस सीमित आय में घर का खर्च, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यकताओं को पूरा करना काफी कठिन हो जाता था।
समूह से जुडने से पहले की स्थिति
समूह से जुडने से पहले उमा साहू का जीवन कई कठिनाइयों से भरा हुआ था। आर्थिक अभाव के कारण बच्चों की पढाई प्रभावित हो रही थी और स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव था। परिवार को अक्सर कर्ज लेना पडता था, जिससे उनकी स्थिति और अधिक कमजोर हो जाती थी। आत्मविश्वास की कमी और संसाधनों की कमी के कारण वे अपने जीवन में आगे बढने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं देख पा रही थीं।
बदलाव की शुरुआत
एक दिन उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के बारे में जानकारी मिली। ब्लॉक मिशन प्रबंधन इकाई (ठडड) के माध्यम से उन्हें स्वयं सहायता समूह के बारे में बताया गया। इस जानकारी ने उनके जीवन में एक नई उम्मीद जगाई। उन्होंने अपने गांव की अन्य 10 महिलाओं के साथ मिलकर “अर्पिता महिला स्वयं सहायता समूह” का गठन किया और समूह की अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम
समूह से जुडने के बाद उमा साहू को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। एनआरएलएम के सहयोग से उन्होंने ब्यूटी पार्लर और सिलाई सेंटर का कार्य शुरू किया। शुरुआत में यह कार्य छोटा था, लेकिन उनकी मेहनत, लगन और निरंतर प्रयासों से यह धीरे-धीरे सफल व्यवसाय में बदल गया। आज उमा साहू न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने समूह की अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं। उनके ब्यूटी पार्लर और सिलाई सेंटर से उन्हें लगभग 18000 रुपये मासिक आय होने लगी है, जो पहले की तुलना में तीन गुना अधिक है।
सामाजिक और आर्थिक बदलाव
उमा साहू के जीवन में आए इस बदलाव का प्रभाव उनके परिवार और समाज दोनों पर पडा है। अब उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और परिवार का जीवन स्तर बेहतर हो गया है। उन्होंने अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और कर्ज से मुक्ति पाई। सामाजिक रूप से भी उनका सम्मान बढा है। गांव की अन्य महिलाएं उन्हें प्रेरणा के रूप में देखती हैं और उनके मार्गदर्शन में स्वयं सहायता समूह से जुडकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ रही हैं।
प्रशासन का योगदान
इस सफलता के पीछे जनपद प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की मंशा के अनुरूप जिलाधिकारी श्री संजय चैहान ने जिले में एनआरएलएम योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया। उनके मार्गदर्शन में योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंचाया गया। डीसी एनआरएलएम प्रवीणा शुक्ला ने जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया। उन्होंने महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन के अवसर उपलब्ध कराए, जिससे उमा साहू जैसी महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकीं।
प्रेरणा का स्रोत
उमा साहू की कहानी यह दर्शाती है कि यदि सही मार्गदर्शन, अवसर और दृढ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है। उन्होंने न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी एक नई राह दिखाई।
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