कब और कैसे करें वट सावित्री व्रत का पारण? जानें शुभ मुहूर्त
May 15, 2026
वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं का पवित्र त्योहार है। इस दिन महिलाएं जीवनसाथी की लंबी आयु की कामना करती हैं और माता सावित्री की पूजा करती हैं। पूरे दिन व्रत रखने के बाद व्रत का पारण करने के बाद ही वट सावित्री व्रत को पूर्ण माना जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं वट सावित्री व्रत पारण मुहूर्त और विधि के बारे में।
वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है। ज्येष्ठ अमावस्या तिथि साल 2026 में 16 मई की सुबह 5 बजकर 11 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 17 मई को सुबह 1 बजकर 33 मिनट पर होगा। इसलिए उदयातिथि के अनुसार वट सावित्री व्रत 16 मई को ही रखा जाएगा।
वट सावित्री व्रत पारण मुहूर्त- वट सावित्री के व्रत का पारण कई महिलाओं के द्वारा अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। वहीं कुछ स्थानों पर अमावस्या तिथि के समापन के साथ ही व्रत का पारण करने की परंपरा है। जो महिलाएं पूरे दिन व्रत रखकर अगले दिन पारण करने वाली हैं उनके लिए पारण का सबगसे शुभ मुहूर्त 17 मई की सुबह 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजे तक रहेगा।
वट सावित्री व्रत पारण विधि
वट सावित्री व्रत का पारण करने से पहले आपको पूजा करनी चाहिए। इसके बाद पूजा में अर्पित किए गए भीगे चने और वट वक्ष की पत्ती को खाकर व्रत का पारण करना चाहिए। इसके साथ ही फलों का सेवन भी व्रत के पारण के दौरान किया जाना चाहिए। पारण के बाद पूरे दिन आपको सात्विक भोजन ही करना चाहिए। इसके साथ ही व्रत का पारण करके घर के बड़ों का आशीर्वाद लेना जरूरी माना जाता है। इसके साथ ही घर के लोगों में प्रसाद भी आपको अवश्य बांटना चाहिए।
