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प्रतापगढः भावपूर्ण एवं गरिमामयी विदाई समारोह आयोजित


प्रतापगढ़।  राणा प्रताप पी.जी. कॉलेज का परिसर उस समय उल्लास, उमंग और भावनाओं से सराबोर हो उठा, जब परास्नातक समाजशास्त्र द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों द्वारा चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों के सम्मान में एक भव्य एवं गरिमामयी विदाई समारोह का आयोजन किया गया। उक्त आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न होकर गुरुदृशिष्य परंपरा, स्नेह, सम्मान और आत्मीयता का अनुपम उदाहरण बन गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं महाराणा प्रताप के चित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डी. के. त्रिपाठी, उपप्राचार्या प्रो. निशा सिंह, समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. बृजेश कुमार सिंह, डॉ. अखिलेश सिंह, डॉ. विरेन्द्र कुमार गुप्ता एवं डॉ. शलिनी सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ाया।

सरस्वती वंदना की मधुर प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक एवं भावपूर्ण बना दिया। इसके पश्चात छात्र-छात्राओं ने गीत, नृत्य, काव्य-पाठ एवं विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिससे सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा “इरावती कर्वे पुरस्कार”, जो पूर्णिमा सिंह को प्रदान किया गया। साथ ही मेधावी छात्र भानु प्रताप को “अगस्त कांटे पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।

अपने आशीर्वचन में प्राचार्य प्रो. डी. के. त्रिपाठी ने कहा, “विद्यार्थी जीवन केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण का स्वर्णिम काल है। आप सभी अपने ज्ञान, अनुशासन और संस्कारों के बल पर समाज में एक नई पहचान स्थापित करें।”

उपप्राचार्या प्रो. निशा सिंह ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा, “सफलता उन्हीं को मिलती है जो निरंतर परिश्रम, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं। आप सभी जीवन में उच्च शिखरों को प्राप्त करें, यही हमारी शुभकामना है।”

समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने कहा, “आप सभी विद्यार्थी विभाग की पहचान हैं, जहां भी जाएं अपने आचरण और ज्ञान से महाविद्यालय का नाम रोशन करें।”

डॉ. अखिलेश सिंह ने विद्यार्थियों को संदेश दिया, “जीवन में चुनौतियाँ आएंगी, लेकिन धैर्य और समर्पण से ही सफलता प्राप्त होती है।”

डॉ. विरेन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा, “ज्ञान के साथ-साथ मानवीय संवेदनाएं भी जीवन में उतनी ही आवश्यक हैं।”

डॉ. शलिनी सिंह ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें और निरंतर सीखते रहें, यही सफलता का मूल मंत्र है।”

चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा पूर्णिमा सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए सभी प्राध्यापकों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि विभाग द्वारा सीमित समय में भी उन्हें विश्वविद्यालयीय परीक्षाओं हेतु उत्कृष्ट मार्गदर्शन प्रदान किया गया। अन्य विद्यार्थियों ने भी अपनी शैक्षणिक यात्रा को यादगार बताते हुए भावुक क्षण साझा किए।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने इसे अत्यंत सफल एवं यादगार बना दिया। अंत में सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन द्वितीय सेमेस्टर के छात्र अक्षत शुक्ला ने किया, जिनकी प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया निस्संदेह, यह विदाई समारोह स्मृतियों, भावनाओं और प्रेरणाओं का ऐसा संगम रहा, जो सभी के हृदय में लंबे समय तक अंकित रहेगा।

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