मानसून 2026 की डेट कन्फर्म! तो इतने दिन बाद होगी बारिश
May 20, 2026
देश का एक हिस्सा इस वक्त भट्टी की तरह तप रहा है, जहां पारा 47-48 डिग्री सेल्सियस छू रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक अच्छी खबर भी आ रही है. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले हफ्ते केरल में दस्तक देने वाला है. लेकिन इस खुशखबरी के साथ एक चेतावनी भी है कि इस बार मानसून की रफ्तार काफी धीमी रहने वाली है, जिसकी वजह से पूरे देश को कवर करने में इसे सामान्य से ज्यादा वक्त लग सकता है.
आमतौर पर मानसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है, लेकिन इस बार यह थोड़ा जल्दी यानी 26 मई 2026 तक केरल के तट से टकराने वाला है. IMD के मुताबिक, यह तारीख 22 मई से 26 मई के बीच की विंडो में हो सकती है, क्योंकि इस पूर्वानुमान में ±4 दिन आगे-पीछे हो सकते है. साल 2025 में मानसून 24 मई को केरल पहुंचा था, जो पिछले कुछ सालों में सबसे जल्दी आने वालों में से एक था.
फिलहाल, मानसून अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों को पार कर चुका है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार मानसून का आगमन भले ही जल्दी हो, लेकिन इसकी शुरुआत बहुत मजबूत और संगठित नहीं दिख रही है. स्काईमेट वेदर के फाउंडर और चेयरमैन जतिन सिंह के मुताबिक, 'मानसून की शुरुआत कमजोर और असंरचित रहने की संभावना है. भारत में सार्थक मानसूनी बारिश आमतौर पर जून से ही शुरू होती है.'
यही वजह है कि इस बार मानसून पूरे देश को कवर करने में सामान्य से कहीं ज्यादा देरी कर सकता है. दरअसल, आमतौर पर मानसून 35 से 38 दिनों में पूरे भारत को कवर कर लेता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रहने की आशंका ज्यादा है. स्काईमेट के अध्यक्ष जीपी शर्मा ने तो यहां तक चेतावनी दे दी है कि इस बार मानसून पर 2002 जैसा खतरा दिख रहा है. तब मानसून 29 मई को केरल में पहुंचा था. इसके बावजूद पूरे देश को कवर करने में उसे 79 दिन लग गए थे. 15 अगस्त को जाकर पूरा देश मानसून से भीगा था.
इस बीच, इसमें बिना बारिश के दिनों की संख्या (मानसून ब्रेक) ज्यादा रह सकती है. जून से सितंबर के दौरान 7 से 14 दिन तक के कई ब्रेक आ सकते हैं, जिसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ेगा.
मानसून आने की खबर के बीच एक बड़ी चिंता अल नीनो की आ रही है. मौसम विभाग और स्काईमेट दोनों ने ही इस बार 'सामान्य से कम' बारिश का पूर्वानुमान जताया है. IMD के मुताबिक, 2026 में मानसूनी बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) की 92% रहने की संभावना है, जिसे 'सामान्य से कम' कैटेगरी में रखा गया है.
स्काईमेट ने इसे LPA का 94% रहने का अनुमान लगाया है. इसकी सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो की स्थिति है, जो आमतौर पर भारत में मानसून को कमजोर करती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जून में तो सामान्य बारिश हो सकती है, लेकिन जुलाई से सितंबर के बीच अल नीनो के प्रभाव से बारिश काफी कमजोर पड़ सकती है. स्काईमेट के मुताबिक, अगस्त में सामान्य से कम बारिश की 60% और सितंबर में 79% संभावना है. इसका सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों पर पड़ सकता है, जहां बारिश की कमी से सूखे जैसे हालात बन सकते हैं.
मानसून की राहत का इंतजार कर रहे उत्तर और मध्य भारत के लोगों को फिलहाल किसी राहत की उम्मीद नहीं है. IMD ने अगले 7 दिनों के लिए 10 राज्यों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है. 18 मई को उत्तर प्रदेश का बांदा 47.6°C के साथ देश में सबसे गर्म रहा, जबकि पंजाब के बठिंडा में 47°C, महाराष्ट्र के वर्धा में 46.5°C और राजस्थान के चित्तौड़गढ़-पिलानी में 46.2°C तापमान रिकॉर्ड किया गया.
20 मई को राजस्थान के 19 जिलों, यूपी के 33 जिलों और पंजाब के 10 जिलों में हीटवेव का अलर्ट है. 21 मई को राजस्थान में गंभीर हीटवेव का अलर्ट है, जबकि छत्तीसगढ़, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भी हीटवेव जारी रहेगी. स्काईमेट का तो यह भी कहना है कि हीटवेव का असर जून के पहले हफ्ते तक जारी रह सकता है, क्योंकि मानसून-पूर्व की गर्मी को कम करने वाले समर थंडरस्टॉर्म इस बार कमजोर पड़ गए हैं.
यह साल मानसून के लिहाज से 'उम्मीद और चुनौती' दोनों लेकर आया है. मानसून भले ही जल्दी दस्तक दे रहा है, लेकिन इसकी धीमी रफ्तार, बार-बार पड़ने वाले ब्रेक और अल नीनो का खतरा इसके सामान्य रहने की राह में बड़ी रुकावटें हैं. जून में तो सामान्य बारिश की उम्मीद है, लेकिन जुलाई से सितंबर के बीच कमजोर मानसून देश की खरीफ फसलों, जल भंडारण और अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकता है.
ऐसे में, किसानों से लेकर आम नागरिकों तक सभी को पानी के सीमित और सोच-समझकर इस्तेमाल की सलाह दी जा रही है. हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इस साल सामान्य से कम बारिश के बावजूद, 2023 जैसे 'लो-नॉर्मल' मानसून की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, बशर्ते बारिश का वितरण अनुकूल रहे. फिलहाल, उत्तर भारत के तपते मैदानों से लेकर दक्कन के पठार तक, सबकी निगाहें आसमान पर टिकी हैं.

