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Sonebhadra: जनपद सोनभद्र में अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड ,पैथोलॉजी केंद्रों के विरुद्ध सीएम पोर्टल पर शिकायत।

सोनभद्र। आरटीआई कार्यकर्ता कमलेश पाण्डेय ने सीएम पोर्टल पर शिकायती पत्र दर्ज करके अल्ट्रासाउंड,पैथोलॉजी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा कि जनपद सोनभद्र में कई अल्ट्रासाउंड केंद्र अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं, जो न केवल स्वास्थ्य नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि आम जनता के जीवन के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं। निम्नलिखित केंद्र विशेष रूप से संदेह के दायरे में हैं—
1- स्वामी कृष्ण आश्रम, रामगढ़, सोनभद्र
2- स्टार डायग्नोस्टिक,सेंटर कचहरी, के सामने सोनभद्र
तथा रॉबर्ट्सगंज, रेनुकूट एवं दुद्धी क्षेत्र में भी कई अन्य केंद्र संदिग्ध रूप से संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन्होंने अन्य जनपदों की डिग्री/पंजीकरण का उपयोग कर लाइसेंस प्राप्त किया है, जबकि वास्तविकता यह है कि इन केंद्रों पर कोई योग्य रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहता है। बिना विशेषज्ञ डॉक्टर की उपस्थिति में अल्ट्रासाउंड जैसे संवेदनशील परीक्षण किए जाना पूर्णतः अवैध एवं अत्यंत खतरनाक है। विश्वसनीय सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि इन केंद्रों का संचालन स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों/कर्मचारियों की मिलीभगत से किया जा रहा है, जिसके कारण अब तक इन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है तथा शासन की छवि को भी प्रभावित कर रही है। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराई जाए। विशेष रूप से दिनांक 1 मार्च से 15 अप्रैल तक के सीसीटीवी फुटेज (तथा पूर्व अवधि के रिकॉर्ड) की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि केंद्रों पर चिकित्सकों की वास्तविक उपस्थिति कितनी रही है और किस प्रकार नियमों का उल्लंघन किया गया है।
जांच के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए—
केंद्रों के पंजीकरण एवं लाइसेंस की वैधता नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट की उपस्थिति एवं उनकी योग्यता
प्रतिदिन किए जा रहे अल्ट्रासाउंड परीक्षणों का रिकॉर्ड सीसीटीवी फुटेज की सत्यता एवं निरंतरता
संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका एवं जिम्मेदारी
मान्यवर, इस प्रकार के अवैध कार्यों से आम जनता का आर्थिक शोषण तो हो ही रहा है, साथ ही गलत रिपोर्ट अथवा लापरवाही के कारण मरीजों के जीवन पर गंभीर खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि इस मामले में उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु जनपद के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का विशेष अभियान चलाकर व्यापक निरीक्षण कराया जाए।

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