सोनभद्र। एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हर जनपद में मेडिकल कॉलेज खोलकर नई इबारत लिख रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।नीति आयोग द्वारा गोद लिया गया सोनभद्र जहां स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की लगातार कोशिशें हो रही हैं वहीं अब स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।कॉलेज प्रशासन जूनियर डॉक्टरों की भारी कमी की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ डॉक्टरों का एक बड़ा वर्ग बिना सूचना के नदारद है।हालात ये हैं कि 96 स्वीकृत जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के सापेक्ष महज 32 ही वर्तमान में कार्यरत हैं जबकि करीब 50 जूनियर डॉक्टर लंबे समय से अनुपस्थित बताए जा रहे हैं जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। सोनभद्र का स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज इस समय दोहरी समस्या से जूझ रहा है एक तरफ डॉक्टरों की भारी कमी और दूसरी तरफ कार्यरत डॉक्टरों पर बढ़ता दबाव।एमबीबीएस के बाद सरकार के साथ हुए बांड के तहत जूनियर डॉक्टरों को तीन साल तक सरकारी संस्थानों में सेवा देना अनिवार्य होता है लेकिन यहां बड़ी संख्या में डॉक्टर इस व्यवस्था का पालन करते नजर नहीं आ रहे हैं।करीब 50 जूनियर डॉक्टर बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित हैं, और कुछ तो कई दिनों से नहीं बल्कि लंबे समय से कॉलेज से गायब हैं। प्रशासन की ओर से ऐसे डॉक्टरों को नोटिस भी जारी किया गया लेकिन इसके बावजूद उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई जिससे स्थिति और गंभीर होती चली गई।डॉक्टरों की इस कमी का सीधा असर इमरजेंसी सेवाओं पर पड़ने लगा है। जहां मरीजों को समय पर इलाज मिलने में दिक्कतें सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं कई अनुपस्थित डॉक्टरों के हॉस्टल के कमरे भी बंद पड़े हुए हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि वे बिना सूचना के कॉलेज छोड़ चुके हैं।कॉलेज प्रबंधन अब नियमों के तहत ऐसे कमरों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कर रहा है।
डॉ0 अखिलेश कुमार (जूनियर डॉक्टर)-
"वेतन भुकतान न होने पर कलेक्ट्रेट पहुचे वहीं जूनियर डॉक्टर वेतन भुगतान में देरी को लेकर भी नाराजगी जता चुके हैं और इस संबंध में प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं।यानि एक तरफ सरकार की गाइडलाइन और बांड की बाध्यता और दूसरी तरफ डॉक्टरों की अपनी समस्याएं इन दोनों के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम मरीज को झेलनी पड़ रही है। नीति आयोग द्वारा गोद लिए गए सोनभद्र जैसे जनपद में जहां पहले से ही स्वास्थ्य सेवाएं चुनौती बनी हुई हैं। वहां डॉक्टरों की यह मनमानी और कमी व्यवस्था को और कमजोर कर रही है।सरकार लगातार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में जुटी है लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसी लापरवाही और गैरजिम्मेदारी कहीं न कहीं पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है।अब जरूरत है सख्त कार्रवाई और ठोस कदमों की ताकि न सिर्फ व्यवस्था पटरी पर लौटे बल्कि मरीजों को भी समय पर बेहतर इलाज मिल सके।
