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खत्म हो जाएगा तेल-LPG का संकट! ईरान-अमेरिका जंग के बीच भारत पहुंचे क्रूड ऑयल के दो सुपरटैंकर


मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-अमेरिका के सीजफायर के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है. शिप ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि ईरान का कच्चा तेल लेकर आने वाले दो बड़े सुपरटैंकर भारत के तट पर पहुंच गए हैं. करीब 7 साल बाद ऐसा हुआ है जब ईरानी तेल की सीधी डिलीवरी भारतीय बंदरगाहों तक आई है. एक बहुत बड़ा टैंकर फेलिसिटी रविवार (12 अप्रैल 2026) की देर रात गुजरात के सिक्का तट के पास आकर रुका. इसमें करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल भरा है, जिसे मार्च के बीच में ईरान के खार्ग द्वीप से लोड किया गया था.

इसी समय दूसरा टैंकर जया ओडिशा के पारादीप तट के पास पहुंचा. इसमें भी लगभग इतनी ही मात्रा में तेल है, जिसे फरवरी के अंत में खार्ग द्वीप से लादा गया था. यह शिपमेंट उस समय भेजा गया था जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू नहीं किए थे और बाद में ईरान ने जवाबी कार्रवाई की. दरअसल, पिछले महीने अमेरिका ने कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में ढील दी थी, जिसके बाद इन टैंकरों को अपना तेल बेचने की अनुमति मिली. इसी वजह से यह करीब सात साल में पहली बार हुआ है कि ईरानी तेल भारत तक पहुंचा है. इस छूट का मकसद दुनिया में तेल की कमी को कम करना और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना था.

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फेल होने के बाद वॉशिंगटन ने फिर सख्ती दिखानी शुरू कर दी है और ईरान के तेल निर्यात को रोकने के लिए उसके बंदरगाहों पर रोक लगाने की बात कही है. इन टैंकरों का तेल किसने खरीदा है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन पारादीप बंदरगाह मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के तहत आता है, जिसने पहले ही इस छूट के दौरान कम से कम एक ईरानी खेप खरीदने की पुष्टि की है.

वहीं गुजरात का सिक्का बंदरगाह रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम के लिए अहम केंद्र है, जहां बड़े स्तर पर कच्चा तेल संभाला जाता है. कुछ समय पहले पिंग शुन नाम का एक टैंकर भी करीब 6 लाख बैरल ईरानी तेल लेकर गुजरात के वाडिनार आने वाला था, लेकिन पेमेंट से जुड़ी दिक्कतों के कारण उसे रास्ते में ही चीन की ओर मोड़ दिया गया. अगर वह भारत पहुंच जाता, तो वही पिछले सात साल में पहली खेप होती.

एक समय था जब भारत ईरान से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता था. इसकी वजह यह थी कि भारतीय रिफाइनरियों के लिए ईरानी तेल उपयुक्त था और व्यापारिक शर्तें भी फायदेमंद थीं. लेकिन 2018 में अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बाद मई 2019 से यह आयात पूरी तरह बंद हो गया. इसके बाद भारत ने दूसरे देशों जैसे मध्य पूर्व, अमेरिका और अन्य जगहों से तेल खरीदना शुरू किया. अपने चरम समय में ईरान का तेल भारत के कुल आयात का करीब 11.5 प्रतिशत था. 2018 में भारत रोजाना लगभग 5.18 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदता था, जो 2019 में घटकर करीब 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया और फिर पूरी तरह बंद हो गया. अभी अनुमान है कि करीब 95 मिलियन बैरल ईरानी तेल समुद्र में टैंकरों पर मौजूद है. इसमें से लगभग 51 मिलियन बैरल भारत को मिल सकता है, जबकि बाकी तेल चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को जा सकता है.

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