पीलीभीत। जिला प्रशासन की सख्ती और जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के स्पष्ट आदेशों के बावजूद शहर में कुछ स्टेशनरी विक्रेता नियमों को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला शहर के चर्चित देव स्टेशनर्स का है, जहां अभिभावकों से किताबों पर अतिरिक्त मूल्य वसूलने और जबरन स्कूल ब्रांडेड कॉपियां व अन्य स्टेशनरी खरीदने के लिए दबाव बनाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस पूरे प्रकरण ने अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।हाल ही में जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए साफ निर्देश दिए थे कि किसी भी अभिभावक को किसी विशेष दुकान से किताबें या स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई स्कूल या विक्रेता इस प्रकार की मनमानी करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में जिला विद्यालय निरीक्षक (क्प्व्ै) के नेतृत्व में एक निगरानी टीम का गठन भी किया गया था, ताकि बाजार में हो रही गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।इसके बावजूद, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। लिटिल एंजेल स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा के अभिभावक जब देव स्टेशनर्स पर कोर्स खरीदने पहुंचे, तो उन्हें कीमतों में भारी गड़बड़ी का सामना करना पड़ा। आरोप है कि किताबों पर प्रकाशकों द्वारा छापे गए मूल मूल्य के ऊपर दुकानदार ने खुद की नई स्लिप चिपकाकर अधिक कीमत वसूलने की कोशिश की। यही नहीं, अभिभावकों को कोर्स के साथ-साथ स्कूल के नाम से छपी कॉपियां और अन्य स्टेशनरी खरीदने के लिए भी मजबूर किया गया।जब एक जागरूक अभिभावक ने इस अंतर को लेकर सवाल उठाया, तो दुकानदार ने संतोषजनक जवाब देने के बजाय अभद्र व्यवहार किया और बात को टालने की कोशिश की। इस घटना के बाद अभिभावक ने उपभोक्ता फोरम और जिलाधिकारी कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस घटना के बाद जिले के अभिभावकों में गहरा रोष है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से बनाई गई निगरानी टीम केवल कागजों तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर दुकानदार बेखौफ होकर अवैध वसूली कर रहे हैं। एक अभिभावक ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “डीएम साहब के आदेशों का कोई असर नहीं दिख रहा। पब्लिकेशन रेट से ज्यादा पैसे वसूलना सीधी-सीधी लूट है। हर साल यही खेल होता है और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है।”गौरतलब है कि हर वर्ष स्कूल खुलने के समय इस तरह के मामले सामने आते हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण दुकानदारों के हौसले बुलंद रहते हैं। इस बार भी सवाल यही उठ रहा है कि क्या प्रशासन इस मामले में सख्त कदम उठाएगा या फिर जांच के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। उनकी सख्त छवि को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, कोर्स बिक्री के नाम पर हो रही इस अवैध वसूली से पीलीभीत के अभिभावक खुद को ठगा हुआ और परेशान महसूस कर रहे हैं, और जल्द न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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