- जब ओबीसी हितों की बात आई ,ठाकुर नेताओं ने आगे बढ़ाई
- पूर्व प्रधानमंत्री मंत्री वीपी सिंह चंद्रशेखर सीएम राजनाथ सिंह अब वसुंधरा
राजस्थान की राजनीति में ही नहीं देश भर राजनीति और सरकार में उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा आरएसएस (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को लिखा गया एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस पत्र में राजे ने अपनी ही पार्टी (बीजेपी) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर तीखे प्रहार किए हैं। केवल वसुंधरा राजे ही नहीं जब जब देश के ओबीसी हितों की बात आई तो वीपी सिंह जहां मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू कर ओबीसी के देवता कहलाएं वहीं चंद्रशेखर जी ने भी प्रधानमंत्री के रहते ओबीसी हितों की रखवाली में कंजूसी नहीं की और जब राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने भी साहसिक कदम उठाते हुए सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू कर डाली लेकिन अपने ही एक मंत्री के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा और अब जब वसुंधरा राजे सिंधिया की सरकार ने ही महिला आरक्षण बिल पर गेम खेलना चाह तो वह भी ठाकुर होने का परिचय देते हुए अपनी ही सरकार की पोल पट्टी खोलने लगीं है जो वर्तमान में चर्चा का विषय बना हुआ है
'महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक साजिश'
पत्र में राजे ने महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़ने के केंद्र सरकार के फैसले पर चिंता जताई है। उन्होंने लिखा है कि-
"यदि हमारी नीयत वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देने की है, तो फिर हम यह कार्य सीधे, स्पष्ट और निष्पक्ष तरीके से क्यों नहीं कर रहे हैं?"
उन्होंने आशंका जताई कि आरक्षण को परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया में उलझाना एक 'व्यापक राजनीतिक षड्यंत्र' हो सकता है, जिसका उद्देश्य लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत किसी एक ही दल को स्थायी लाभ पहुँचाना है।
परिसीमन पर उठाए तीन गंभीर सवाल
राजे ने परिसीमन की प्रक्रिया के माध्यम से साधे जा रहे 'खतरनाक राजनीतिक उद्देश्यों' का उल्लेख किया है-
क्षेत्रीय असंतुलन: उन राज्यों में लोकसभा सीटें बढ़ाना जहाँ भाजपा मजबूत है, ताकि चुनाव में संरचनात्मक लाभ मिल सके।
विपक्ष को कमजोर करना:
विपक्ष के वोटों को इस तरह विभाजित करना कि वे हार-जीत तय करने की स्थिति में न रहें।
पुराने आंकड़े:
2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन लागू करने से एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों को उनके वास्तविक अनुपात में प्रतिनिधित्व न मिलना।
पार्टी की छवि और नेतृत्व पर प्रहार
वसुंधरा राजे ने पत्र में बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी की पहचान 'संस्कार और राष्ट्रधर्म' के बजाय 'साजिश, सत्ता-लोभ और राजनीतिक बदनीयती' से जुड़ने लगी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब "घर की नारी का सम्मान सुरक्षित नहीं है", तब संसद में नारी सम्मान पर भाषण देना केवल 'पाखंड' प्रतीत होता है।
संघ प्रमुख से हस्तक्षेप की मांग
संघ प्रमुख मोहन भागवत की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए राजे ने पूछा कि क्या इस मौन को 'विवशता' माना जाए या 'वैचारिक समझौता'? उन्होंने आग्रह किया कि राष्ट्र, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए संघ का हस्तक्षेप आवश्यक है ताकि 'राजधर्म पर अधर्म की निरंकुशता' को रोका जा सके।
विनेश ठाकुर सम्पादक
विधान केसरी लखनऊ



