बलिया। सरकारी तंत्र की कार्यक्षमता का सबसे बड़ा पैमाना यदि कोई है, तो वह है राजस्व वसूली। बलिया में हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी द्वारा जताई गई नाराजगी यह साफ संकेत देती है कि प्रशासन अब ढिलाई को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
विकास भवन में आयोजित बैठक में परिवहन, आबकारी, पीडब्ल्यूडी और मंडी जैसे विभागों की कमजोर वसूली पर खुलकर सवाल उठाए गए। यह केवल आंकड़ों की कमी नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है। पिछले वित्तीय वर्ष में लक्ष्य के अनुरूप वसूली न होना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं जिम्मेदारियों का सही निर्वहन नहीं हुआ।
जिलाधिकारी द्वारा एसडीएम और तहसीलदारों को सीधे जिम्मेदारी सौंपना प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा सकता है। अब वसूली केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसकी नियमित समीक्षा और निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी। हर 15 दिन में समीक्षा और साप्ताहिक संवाद जैसे निर्देश यह स्पष्ट करते हैं कि अब काम की गति और गुणवत्ता दोनों पर नजर रखी जाएगी।
आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी सख्ती यह बताती है कि प्रशासन अब केवल राजस्व तक सीमित नहीं, बल्कि जनसंतुष्टि को भी प्राथमिकता दे रहा है। नेगेटिव फीडबैक पर विशेष ध्यान देने का निर्देश प्रशासन की जवाबदेही को और अधिक पारदर्शी बनाता है।
साफ है कि बलिया में अब प्रशासनिक कार्यशैली में बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। यदि यह सख्ती जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।
