आज पूरे देश में बाबा साहेब डाक्टर भीमराव अम्बेडकर जिन्हें देश विदेश के लोग भले ही भारतीय संविधान निर्माता के रूप में जानते हो लेकिन मैं विनेश ठाकुर सम्पादक विधान केसरी शपथ पूर्वक कह सकता हूं कि मैं उन्हें संविधान निर्माता के साथ साथ गरीबों शोषितों का भगवान और लोकतंत्र का जन्मदाता मानता हूं इतना ही नहीं उन्हें सत्ता हासिल करने का सफल शस्त्र भी कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
आज बाबा साहेब की जयंती केवल एक दो दल ही नहीं देश के बड़े छोटे सभी राजनीतिक व सामाजिक दल मना रहे हैं। मैं कोई बड़ा दावा या जीवनी तो इन महापुरुष की नहीं लिख सकता और ना ही मेरी इतनी हैसियत है लेकिन यह जरूर कह सकता हूं आज बाबा साहेब गरीबों से ज्यादा राजनीतिक दलो के साथ साथ अमीरों की भी बड़ी आवश्यकता बन गये है और वह भी जय भीम करते नजर आते हैं जो कभी उनकी उंगली पर उदहारण देते थे या मूर्ति स्थापना की रोक के लिए जान लगा देते हैं एक समय तो ऐसा भी आया जब उत्तर प्रदेश की कुछ पार्टियों ने सत्ता में आने पर बाबा साहेब के नाम पर बसपा द्वारा बनाए गए जिलों एवं अम्बेडकर स्थलों को पत्थर का किला तक बताने में संकोच नहीं किया लेकिन उनके द्वारा सभी को दी गई समान वोट की कीमत ने न सिर्फ जय भीम कहने को मजबूर कर दिया बल्कि जयंती मनाना भी इनकी मजबूरी हो गई। मुझे यह लिखने में भी कोई संकोच नहीं है कि मैं स्वयं ऐसे कई नेताओं को जानता हूं बाबा साहेब जिनकी रोजी रोटी का जरिया और चर्चा में बने रहने का जरिया बन गए हैं यह अलग बात कि आज बाबा साहेब के नाम पर अपनी दुकान चलाने वालो की लम्बी कतार लग गई हो लेकिन बसपा के अलावा उनके कारवां को आगे बढ़ाने का काम कोई नहीं सका मैं यह भी दावे के साथ कह सकता हूं कि बसपा भी सर्व जन हिताए सर्व जन सुखाए के कारण उनके कारवां को उनकी इच्छा के अनुसार बहुत आगे नहीं ले जा सकी लेकिन बसपा ने गरीबों दलितों वंचितों में जो राजनीतिक सम्मान की भूख पैदा की वह शिक्षा की तरह कभी समाप्त होने वाली नहीं है।
मेरा मानना है कि चाहे वंचित वर्ग से आने वाला कोई नेता अभिनेता या सामाजिक कार्यकर्ता अथवा किसी भी दल से विधायक सांसद मंत्री मुख्यमंत्री अथवा गवर्नर बन जाए या कोई न्यायधीश, आईएएस, आईपीएस सहित किसी भी कैटेगरी का अधिकारी बन जाए वह पूरी तरह न सही लेकिन संविधान के दायरे में रहकर जरूर गरीबों की मदद करेगा। बाबा साहेब ने जो शैक्षणिक सम्मान का सपना देखा था उस पर भले ही कोई गहरी साजिश काम कर रही हो लेकिन आज गरीब से गरीब भी अपने बेटे बेटी को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए प्रयासरत हैं जो बाबा साहेब के कारवां की श्रेणी में आता है। रही बात लोकतंत्र की तों मैं संविधान से पहले के लोकतंत्र या राजतंत्र में जाना नहीं चाहता लेकिन अपनी जानकारी के मुताबिक यह जरूर कह सकता हूं देश के गरीबों पिछड़ों महिलाओं को वास्तविक लोकतंत्र बाबा साहेब द्वारा लिखें गए संविधान से मिला है।
मुझे खुशी है कि आज कोई वोट के तो कोई नोट के, कोई स्वाभिमान के तो कोई सम्मान के, चक्कर में ही सही बाबा साहेब का फोटो गले या आफिस में लगाकर उनकी पूजा कर रहा है इस लिए मैं उन्हें भगवान का दर्जा देता हूं मुझे आज के समय में यह कहने की तों आवश्यकता नहीं है कि आओ आज महामानव गरीबों के भगवान, जरूरतमंदों के मसीहा, संविधान निर्माता की जयंती पर उन्हें याद करें, क्योंकि आज हर कोई बाबा साहेब का गुणगान करने में लगा है हां इमानदारी के नाम से मशहूर भारतीय संस्कृति में शामिल अपने देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बन जाती है कि देश की समूची आबादी को एक जगह रखकर धन ,धरती शिक्षा, सम्मान का बंटवारा करके बाबा साहेब के सपनों का भारत बनाने का काम करे मैं दावे के साथ कह सकता हूं देश के छोटे बड़े गरीब अमीर दलित पिछड़े हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सभी खुद के भारतीय होने पर गर्व करेंगे जिसको बाबा साहेब के लिए सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में जाना जाएगा ,वरना छल-कपट प्रपंच भेदभाव से भले ही कुछ लोग अमीर बन जाए लेकिन बाबा साहेब के भारत का निर्माण होने वाला नहीं है कहने वाले इसे झूठी श्रद्धांजलि बताने में संकोच नहीं करेंगे। इस लिए कृपया देश के सभी नागरिक ध्यान दें बाबा साहेब के जन्म दिवस पर एक ऐसा संकल्प लें कि सभी के हिस्से में धन धरती शिक्षा सम्मान और स्वाभिमान आ सके।
सभी को जय भीम, नमस्कार, प्रणाम, राम राम, सत श्री अकाल, सलाम। मेरी ओर से बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि।
विनेश ठाकुर सम्पादक
विधान केसरी लखनऊ
