प्रतापगढ़। भारतीय संगीत जगत की स्वर साम्राज्ञी, सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका आदरणीय आशा भोंसले जी के प्रति संस्कार भारती, प्रतापगढ़ इकाई द्वारा गहन श्रद्धा एवं सम्मान व्यक्त किया गया।
संस्था के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने कहा कि आशा जी ने अपने दीर्घ और समृद्ध संगीत जीवन में जिस प्रकार भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया, वह अद्वितीय और प्रेरणादायी है। उनकी मधुर, लचीली और भावपूर्ण आवाज ने न केवल भारत बल्कि विश्व भर के संगीत प्रेमियों के हृदय में अमिट स्थान बनाया है।
संस्कार भारती के सदस्यों ने उनके सुप्रसिद्ध गीतों को स्मरण करते हुए कहा कि- पिया तू अब तो आजा, दम मारो दम, इन आंखों की मस्ती, चुरा लिया है तुमने जो दिल को (यादों की बारात) - चुरा लिया है तुमने जो दिल को, दम मारो दम, ये मेरा दिल प्यार का दीवाना, झुमका गिरा रे, बरेली के बाजार में, सजना है मुझे सजना के लिए (सौदागर), आइये मेहरबाँ (हावड़ा ब्रिज), बैठिये जाने-जाँ, ओ हसीना जुल्फों वाली जाने जहाँ, मेरा कुछ सामान, जैसे अनेकों गीत आज भी जन-जन की जुबान पर हैं और उनकी गायकी की बहुमुखी प्रतिभा का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि आशा जी की संगीत साधना, समर्पण और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं। उनका संपूर्ण जीवन भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। अंत में संस्था की ओर से उन्हें सादर नमन करते हुए कहा गया- “शरीर भले ही नश्वर हो, लेकिन कुछ स्वर समय की सीमाओं से परे सदैव गूंजते रहते हैं। आशा जी की आवाज भी युगों-युगों तक संगीत प्रेमियों के हृदय में जीवित रहेगी।
इस श्रद्धांजलि सभा के अवसर पर डॉ. बृजभानु सिंह, डॉ. गौरव त्रिपाठी, सुप्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार डॉ. श्याम शंकर शुक्ल श्याम, सुनील प्रभाकर, श्री नारायण शुक्ला, संजय खरे, लक्ष्मी मिश्रा, चंदन जायसवाल, शिवकुमार विश्वकर्मा एवं संस्था के महासचिव श्री अनूप उपाध्यक्ष अनुपम आदि उपस्थित थे।
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