अरविंद केजरीवाल हाई कोर्ट में खुद बने अपने 'वकील', सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित
April 14, 2026
आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल समेत अन्य की याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया. याचिका में इस मामले में लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को अलग किए जाने की मांग ( रिक्यूजल) की गई है. सोमवार (13 अप्रैल) को अरविंद केजरीवाल ने खुद कोर्ट में अपनी दलील दी.
सीबीआई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. वहीं दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की तरफ से सीनियर वकील संजय हेगड़े ने दलील रखी.
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की रिक्यूजल की अर्जी को सख्ती से खारिज किया जाना चाहिए. दूसरी बेंचों ने भी इस पर विचार किया है और इसी नतीजे पर पहुंची हैं. एसजी ने कहा कि हम जीत सकते हैं, हम हार सकते हैं लेकिन हमें अदालत के प्रति निष्पक्ष रहना होगा.
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि यह कहना बहुत आसान है कि इस मामले को किसी अन्य जज के पास भेज दिया जाए, लेकिन इससे जो मिसाल कायम होगी, उस पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे यह मिसाल बनेगी कि महज अटकलों के आधार पर और लगभग जज को बदनाम करते हुए, कोई वादी अपनी पसंद की बेंच चुन सकता है। सवाल यह नहीं है कि माननीय न्यायाधीश इस मामले की सुनवाई कर सकती हैं या नहीं, बल्कि यह है कि अगर इस आधार पर जज खुद को अलग करने लगें तो क्या कोई भी जज इन मामलों की सुनवाई कर पाएगा?
अरविंद केजरीवाल ने अपनी दलील में कहा कि एक पुरानी परंपरा है कि जज के निकट सम्बन्धी अगर राजनीतिक पार्टी/सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े हों तो जज सुनवाई से अलग हो जाते हैं.
