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पीलीभीत: अपराधी की महफिल में झूमे वर्दीधारीरू बनियान में डांस करते वीडियो वायरल, तीन सिपाही निलंबित! कानून के रखवालों पर उठे गंभीर सवाल एसपी ने दिखाई सख्ती, सीओ को सौंपी जांच


पीलीभीत। कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस खुद जब अपराधियों के साथ जश्न मनाती नजर आए, तो यह न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है बल्कि आम जनता के भरोसे को भी गहरी चोट पहुंचाता है। बीसलपुर कोतवाली में ऐसा ही एक चैंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शातिर अपराधी की जन्मदिन पार्टी में शामिल होकर तीन पुलिसकर्मियों ने न सिर्फ वर्दी की मर्यादा तार-तार की, बल्कि पूरे महकमे की छवि को भी धूमिल कर दिया।मामला उस समय तूल पकड़ गया जब इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। जानकारी के अनुसार यह वीडियो 8 अप्रैल का है बताया जा रहा है  जिसमें कोतवाली में तैनात हेड कांस्टेबल यश शर्मा, हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र कुमार और सिपाही सुधीर कुमार एक नामजद आरोपी रूपेश के घर पर आयोजित जन्मदिन की पार्टी में खुलेआम डांस करते नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह रही कि पुलिसकर्मी वर्दी में नहीं, बल्कि बनियान जैसे सामान्य कपड़ों में अपराधी के साथ ठुमके लगाते दिखाई दिए।जिस आरोपी के साथ ये पुलिसकर्मी जश्न मना रहे थे, वह कोई आम व्यक्ति नहीं बल्कि पहले से ही गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित है। रूपेश, जो मोहल्ला दुबे का निवासी बताया जा रहा है, उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट समेत कई अन्य धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। ऐसे में उसके साथ पुलिसकर्मियों की नजदीकी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैंकृक्या अपराधियों से सांठगांठ का यह खुला उदाहरण नहीं है? क्या कानून के रखवाले खुद कानून तोड़ने वालों के संरक्षक बन बैठे हैं? वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने तुरंत संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए। इंस्पेक्टर से रिपोर्ट तलब की गई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इसके बाद बिना किसी देरी के तीनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।एसपी ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीर मानते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी भी थाना, कोतवाली या चैकी स्तर पर इस तरह की लापरवाही या अनुशासनहीनता सामने आती है, तो संबंधित थाना प्रभारी को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा। मामले की गहन जांच अब क्षेत्राधिकारी (सीओ) पूरनपुर को सौंपी गई है, ताकि सच्चाई की तह तक जाकर आवश्यक कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।इस घटना ने आम जनता में आक्रोश पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि जब पुलिसकर्मी ही अपराधियों के साथ जश्न मनाते नजर आएंगे, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जहां लोग पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।यह घटना न सिर्फ पुलिस विभाग के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सिस्टम के भीतर अनुशासन और नैतिकता को बनाए रखना कितना आवश्यक है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद और कितने चेहरे बेनकाब होते हैं और क्या इस मामले में कोई ठोस उदाहरण पेश किया जाता है या नहीं।

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