रूद्रपुर। कुर्मी महासभा की प्रदेश अध्यक्ष एवं अधिवक्ता शिवांगी गंगवार ने पुष्कर सिंह धामी से उत्तराखंड में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर कड़े दिशा-निर्देश लागू कर अभिभावकों को राहत दी जानी चाहिए।
शिवांगी गंगवार ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल हर साल अभिभावकों पर नई किताबें, नई यूनिफॉर्म, तय दुकानों से खरीदारी, परिवहन शुल्क, वार्षिक शुल्क और अन्य छिपे खर्चों का बोझ डाल रहे हैं। इससे मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर गंभीर असर पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में पहले से ही सख्त नियम लागू हैं, जिनके तहत स्कूल अभिभावकों को किसी एक विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते साथ ही हर साल यूनिफॉर्म बदलने पर रोक है और यदि पुरानी किताबें उपयोग योग्य हों तो छात्रों को नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाता गंगवार ने कहा कि वहां फीस वृद्धि को भी नियंत्रित करने के लिए नियम बनाए गए हैं। निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ोतरी होने पर अभिभावक शिकायत कर सकते हैं और कई जिलों में इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तथा नियामक समिति की अनुमति से जोड़ा गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर फीस, परिवहन शुल्क, अन्य शुल्क, ड्राइवरों का विवरण, वाहन परमिट और सुरक्षा संबंधी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य किया गया है। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना, एफआईआर और मान्यता रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जाती है। शिवांगी गंगवार ने मुख्यमंत्री धामी से मांग करते हुए कहा कि उत्तराखंड में भी निम्नलिखित नियम तत्काल लागू किए जाएं।
किसी भी स्कूल द्वारा निर्धारित दुकान से खरीदारी की बाध्यता समाप्त होहर वर्ष यूनिफॉर्म और किताबें बदलने पर रोक लगेपुरानी किताबों के उपयोग की अनुमति दी जाएफीस वृद्धि के लिए जिला स्तरीय समिति की स्वीकृति अनिवार्य होस्कूलों को सभी शुल्क और सुरक्षा संबंधी जानकारी सार्वजनिक करनी होनियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए अभिभावकों के लिए टोल-फ्री नंबर और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल शुरू किया जाए
उन्होंने कहा कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, व्यवसाय नहीं बच्चों की पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। राज्य सरकार को इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।।
