रुद्रपुर। शहर में एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत ने अब विकराल रूप ले लिया है। बुधवार तड़के सुबह 4 बजे से ही सैकड़ों उपभोक्ता इंडेन गैस एजेंसी के बाहर लंबी-लंबी कतारों में खड़े नजर आए। तपती गर्मी, घंटों का इंतजार और अनिश्चितता के बीच लोगों का सब्र जवाब देता दिखा और “सिलेंडर दो-सिलेंडर दो” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई उपभोक्ता रात से ही लाइन में लग गए थे, लेकिन सुबह तक भी उन्हें सिलेंडर मिलने की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई। महिलाओं, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।
जनता की बढ़ती नाराजगी को देखते हुए समाजसेवी सुशील गाबा मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने लाइन में खड़े लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। गाबा ने एजेंसी प्रबंधन, स्टाफ और होम डिलीवरी कर्मियों से भी चर्चा करते हुए वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की अपील की।
उन्होंने बताया कि संकट की मुख्य वजह आपूर्ति में भारी कमी है। “जहां रोजाना तीन गाड़ियों की जरूरत है, वहां सिर्फ एक गाड़ी ही सिलेंडर लेकर पहुंच रही है। इससे बैकलॉग लगातार बढ़ रहा है और आम उपभोक्ता को समय पर गैस नहीं मिल पा रही,” उन्होंने कहा।
गाबा ने डीएसी सिस्टम को भी समस्या की जड़ बताते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के चलते वितरण व्यवस्था जटिल हो गई है। “डीएसी पर्ची की बाध्यता के कारण सिस्टम पर अनावश्यक दबाव पड़ रहा है, जिससे सिलेंडर लोडिंग और डिलीवरी में देरी हो रही है,” उन्होंने आरोप लगाया। उन्होंने पुरानी पर्ची आधारित बुकिंग प्रणाली को फिर से लागू करने की मांग उठाते हुए कहा कि इससे प्रक्रिया सरल और तेज हो सकती है।
वहीं, पार्षद सचिन मुंजाल ने बताया कि घरेलू गैस के साथ-साथ कमर्शियल सिलेंडरों की भी भारी कमी हो गई है। “सैकड़ों चाय की दुकानें, ढाबे और छोटे-छोटे होटल गैस न मिलने के कारण बंद हो चुके हैं। इससे हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है,” उन्होंने कहा। उन्होंने प्रशासन से नए कमर्शियल कनेक्शन जारी करने और नियमित सप्लाई बहाल करने की मांग की।
पार्षद परवेज कुरैशी ने भी बस्तियों में बढ़ते जनदबाव का जिक्र करते हुए कहा कि लोग लगातार जनप्रतिनिधियों से जवाब मांग रहे हैं। “हर घर में गैस की जरूरत है, और जब यह मूलभूत सुविधा ही प्रभावित हो जाए तो जनता का आक्रोश स्वाभाविक है,” उन्होंने कहा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस एजेंसियों के बाहर अव्यवस्था, सूचना की कमी और ब्लैक मार्केटिंग की आशंका ने हालात को और बिगाड़ दिया है। कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को बिना लाइन के सिलेंडर मिल रहे हैं, जबकि आम आदमी घंटों इंतजार करने के बावजूद खाली हाथ लौट रहा है।
रुद्रपुर में गैस संकट अब केवल आपूर्ति की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक संकट का रूप ले चुका है। यदि जल्द ही आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो यह जनाक्रोश और तेज हो सकता है तथा बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।।
