पीलीभीत। जनपद में चल रही गेहूं खरीद प्रक्रिया के बीच प्रशासन द्वारा की जा रही सख्त निगरानी में एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। किसानों की सुविधा और समयबद्ध खरीद सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी के निर्देश पर किए गए औचक निरीक्षण में एक खरीद केंद्र की पूरी व्यवस्था ही सवालों के घेरे में आ गई। निरीक्षण के दौरान केंद्र प्रभारी के मौके से नदारद मिलने, केंद्र समय पर संचालित न होने और किसानों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतों के चलते प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से केंद्र प्रभारी को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपर जिला सहकारी अधिकारीध्सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता द्वारा गुरुवार को सहकारी संघ लिमिटेड शिवनगर एट पूरनपुर मंडी समिति स्थित गेहूं खरीद केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया। यह निरीक्षण जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के क्रम में किया गया था, जिसमें सभी खरीद केंद्रों की कार्यप्रणाली, समयपालन, पारदर्शिता और किसानों को मिल रही सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया जाना था।निरीक्षण टीम जब सुबह लगभग 11रू50 बजे केंद्र पर पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद चिंताजनक था। केंद्र पूरी तरह बंद मिला और केंद्र प्रभारी मौके पर उपस्थित नहीं थे। इतना ही नहीं, उनके द्वारा किसी भी प्रकार की पूर्व सूचना, अनुमति या वैध कारण भी प्रस्तुत नहीं किया गया। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना को दर्शाती है, बल्कि किसानों के प्रति लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को भी उजागर करती है।जांच के दौरान यह भी सामने आया कि केंद्र प्रभारी शिवनगर द्वारा लंबे समय से मनमानी की जा रही थी। किसानों ने शिकायत की थी कि खरीद प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जाती है, जिससे उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रभारी का व्यवहार अभद्र और असहयोगात्मक रहता है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान होते हैं। इसके अलावा प्रभारी का मोबाइल फोन अधिकतर समय बंद रहना, संपर्क में न आना और कार्यस्थल से गायब रहना उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रशासन ने इन सभी तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया और संबंधित केंद्र प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही विभागीय स्तर पर आगे की जांच भी प्रारंभ कर दी गई है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि इस लापरवाही में और कौन-कौन जिम्मेदार है तथा क्या अन्य स्तरों पर भी अनियमितताएं हो रही हैं।
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन द्वारा संचालित महत्वपूर्ण योजनाओं, विशेषकर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद जैसी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि किसी भी खरीद केंद्र पर किसानों को असुविधा होती है, अनियमितता पाई जाती है या अधिकारीध्कर्मचारी अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतते पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने सभी केंद्र प्रभारियों और संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया है कि वे समय से केंद्र खोलें, किसानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें और शासन की मंशा के अनुरूप कार्य करें।
इस घटना के बाद जनपद के अन्य खरीद केंद्रों पर भी प्रशासन की नजर और अधिक कड़ी हो गई है। लगातार निरीक्षण और सख्त कार्रवाई की चेतावनी के चलते अब कर्मचारियों में सतर्कता बढ़ी है। वहीं किसानों को उम्मीद जगी है कि अब उनकी समस्याओं का समाधान होगा और उन्हें अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
कुल मिलाकर, यह कार्रवाई प्रशासन की सख्ती और किसानों के हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अब देखना यह होगा कि इस कदम के बाद खरीद केंद्रों की कार्यप्रणाली में कितना सुधार आता है और किसानों को कितनी राहत मिलती है।
