ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में विकास कार्यों को पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। गांव में न तो सड़कों का निर्माण कराया गया और न ही अन्य मूलभूत सुविधाओं पर कोई कार्य दिखाई देता है। इसके बावजूद सरकारी अभिलेखों में भारी खर्च दर्शाकर धन का दुरुपयोग किया गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले की शिकायत कई बार उच्च अधिकारियों से की गई, लेकिन हर बार मामले को दबाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि संबंधित अधिकारी भी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। परेशान ग्रामीणों ने अब भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेताओं से संपर्क कर न्याय की गुहार लगाई है। भाकियू नेताओं ने मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें-पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए! दोषी प्रधान व संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो! ग्राम निधि के खर्च का सार्वजनिक लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाए।
